पेशे के साथ आपकी अपनी आस्था का रिश्ता हो या न हो इतना तो जरूर है कि अगर आप में दृढ इच्छाशक्ति हो तो आपकी आस्था आपके पेशे में कभी आड़े नहीं आएगी। केरल में मस्जिद के निर्माण के लिए जो वास्तुकार लोगों की पहली पसंद हैं, वे हैं गोविंदन गोपालकृष्णन। नायाब मस्जिदों और गिरजाघरों की डिजाइन तैयार करने वाले गोपालकृष्णन हिंदू धर्म-कर्म में गहरी अस्था रखते हैं, लेकिन उनकी आस्था उनके पेशे में कभी आड़े नहीं आती।गोपालकृष्णन कहते हैं मेरे धर्म ने मेरे करियर के लिए कभी कोई समस्या नहीं खड़ी की। मुस्लिम भाइयों को मुझ पर इस तरह का भरोसा है, जैसे मैं उनके बीच का ही एक हूँ। उन्होंने एकाध मौकों को छोड़ कर मेरे डिजाइन पर कभी कोई एतराज नहीं किया।गोपालकृष्णन का दिल और आत्मा इन मस्जिदों में रचा बसा है। मस्जिद बनाना उनके लिए कोई यांत्रिक क्रिया नहीं है। वे बड़ी तन्मयता से मस्जिदों के गुंबदों और मीनारों के नक्शे तैयार करते हैं। इसके लिए वे उस वक्त तक इन नक्शों को बनाते और उन्हें खारिज करते रहते हैं, जब तक हर गुंबद और मीनार को एक खास शैली और ढाँचे में ढाल नहीं लेते। गोपालकृष्णन कहते हैं यह कुछ नहीं बस ऊपर वाले की कृपा है, वरना कैसे कोई आदमी इस तरह की करियर की उपलब्धि हासिल करता, जिसके पास कोई औपचारिक डिग्री भी नहीं। काम के प्रति अपने इसी लगाव के कारण भवन निर्माण में 50 साल से लगे दिग्गज वास्तुकार गोपालकृष्णन ने अब तक 88 मस्जिदों का निर्माण किया है। इसके अलावा चार चर्च और एक मंदिर बनाने का सेहरा भी उनके सिर है। उन्होंने अनेक अस्पताल स्कूल और कॉलेजों का भी निर्माण किया है।उनकी बनाई हुई पलायम मस्जिद की गिनती शानदार मस्जिदों में होती है। उनकी उपलब्धियों में तिरुवनंतपुरम की बीमा मस्जिद का जीर्णोद्धार शामिल है, जो दक्षिण भारत में मुसलमानों की एक प्रमुख जियारतगाह है। गोपालकृष्णन ने एरूमेली स्थित बाबर मस्जिद का भी जीणोद्धार किया, जो सबरीमाला के भगवान अयप्पा के मुस्लिम शिष्य को समर्पित है।वे कहते हैं कि हाल के दशकों में केरल की मस्जिदों की वास्तुकला में जबरदस्त फेरबदल आया है। सदियों से केरल की मस्जिदें वास्तु परंपरा के अनुरूप बनाई जाती थीं।वे बताते हैं कि मुसलमान काबा शरीफ की तरफ रुख कर नमाज पढ़ते हैं, इसलिए मस्जिद के निर्माण से पहले काबा शरीफ की अवस्थिति निर्धारित करना जरूरी होता है। |