तरावीह की नमाज में बुधवार को हाफिज साहब कुरआन के आठवें-नौवें पारे की तिलावत करेंगे। सुरा-एराफ में इरशाद है कि ऐ लोगों! अपने रब को छोड़कर दूसरों के पीछे न भागो, क्योंकि कयामत में तुमसे और तुम्हारे पैगम्बरों से पूछा जाएगा। तुम्हें जमीन पर भेजने से पहले फरिश्तों ने सिज्दे किए। तुम्हें ढेरों नेअमतें देकर भेजा गया।
जो लोग अल्लाह की नाफरमानी करेंगे, पैगम्बर के बताए मार्ग पर नहीं चलेंगे उनके लिए जन्नत या स्वर्ग में जाना ठीक ऐसा है, जैसे सुई के नाके में से कभी ऊँट नहीं निकल सकता। नेक आमाल (अच्छे आचरण) करने वालों के लिए जन्नात की खुशखबरी है।
कुरआन के इसी तिलावत में जो लोग बदकारियों में लगे हैं या अल्लाह से नहीं डरते हैं, उनके अजाबों का जिक्र किया गया है। अल्लाह ताअला अपने प्यारे नबी से फरमाते हैं कि लोगों को बताओ कि हमने रोजे-अव्वल इंसानों की रूहों से पूछा था कि क्या मैं तुम्हारा रब नहीं हूँ? सब ने एक ही जवाब दिया था- तू ही हमारा रब है।
आखिर में मोहम्मद सल्ल. से कहा गया कि अपना विरोध करने वाले का मुकाबला सब्र से करें, तभी तब्लीग (विस्तार) या दीन का फैलाव आसान होगा। अल्लाह ने कहा कि आप नरमी बरतें, अच्छा व्यवहार करें और जाहिलों से न उलझें।
सातवीं तरावीह : कुरआन में अल्लाह ताअला ईसा अलेहिस्सलाम के बारे में फरमाता है कि तुम्हारी पैदाइश को अजूबा बनाया तरह-तरह की नेअमतें तुम्हें और तुम्हारी माँ को दीं। हर लिहाज से तुम्हारी कौम को नवाजा था, लेकिन अल्लाह को छोड़ तुम्हारी माँ और तुम्हें 'रब' बना लिया। इसके बाद सूरा इनाम में अल्लाह ताआला फरमाता है कि अल्लाह और बनावटी खुदाओं में फर्क यह है कि अल्लाह रिज्क (भोजन) देता है, लेता नहीं। जिनके कर्म या आचरण खराब हैं, उसका जवाब उन्हीं को देना है और अल्लाह का हुक्म नहीं मानते उनका अंजाम तय है। | हमारी नमाज, हमारी इबादत, हमारा जीना-मरना सब अल्लाह के लिए है जिसका कोई शरीक नहीं। फरमाया कि माँ-बाप के साथ नेक सुलूक करें। बेशर्मी से बचो। |
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हजरत इब्राहीम का वाकेआ बयान करते हुए कहा गया है कि उस शख्स से जालिम कौन होगा, जो अल्लाह पर झूठ और इल्जाम लगाए और उसकी आयतों को न माने। ईमान वालों से कहा गया कि इनके मानने वालों को बुरा न कहो। कहीं ऐसा न हों कि यह अल्लाह से गुस्ताखी कर बैठे। मोहम्मद सल्ल. से कहा गया कि परवरदिगार ने नेक राह या सीधा रास्ता दिखाया। किसी की जान को मारो नहीं। अनाथों के माल से परहेज करो। नाप-तौल में बेईमानी न करें। अल्लाह या बंदों से जो वादा करो, उसे जरूर निभाओ।
(कुरआन के सातवें -आठवें पारे की तलावत)
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