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मध्यप्रदेश के हरदा बैतूल और खंडवा जिलों में दीपावली के त्योहार के बाद शुरू होने वाले 5 दिवसीय ठाठ्या बाजार उत्सव में प्रणव पर्व की मस्ती के साथ आदिवासी युवा अपने जीवनसाथी का चुनाव करते हैं। मध्यप्रदेश में कोरकू आदिवासियों की जीवन शैली ठाठ्या जाति की गणना कोरकू और गोंड में ही की जाती है लेकिन यह जनजाति इस मायने में भिन्न होती है कि शादी और अन्य निजी आयोजनों को छोड़ कर यह साल भर लोगों से माँग कर ही भोजन करती है।

उन्होंने कहा कि दीपावली के बाद लगभग 5 दिन तक हरदा बैतूल और खंडवा जिलों के आदिवासी अंचलों में ठाठ्या बाजार लगते हैं । इन बाजारों में तरह-तरह की सामग्री भी बिकने आती हैं । इसी बाजार में आदिवासी युवा अपने जीवनसाथी का चुनाव करते हैं । ठाठ्या समुदाय के युवक इस दौरान बाजार में मस्ती भरे गीत गुनगुनाते हुए झूम कर नाचते हैं । नृत्य के समय वे सिर पर भैंस का सींग लगा कर ढोलक बजाते हैं और अपने शरीर को कौडियों की माला से सजाते हैं।

इस उत्सव के दौरान इस समुदाय के युवक उस युवती को अपने साथ भगा कर ले जाते हैं जिनके साथ उनका प्रणय संबंध पूर्व से ही होता है । बाद में दोनों की शादी हो जाती है। यही वजह है कि इस समुदाय के युवा साल भर ठाठ्या बाजार उत्सव की प्रतीक्षा करते हैं।
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