मुख्य पृष्ठ > धर्म-संसार > व्रत-त्योहार > अन्य त्योहार
सुझाव/प्रतिक्रियामित्र को भेजियेयह पेज प्रिंट करें
 
सरस्वती वंदना

WD
हे हंसवाहिनी ज्ञानदायिनी
अम्ब विमल मति दे। अम्ब विमल मति दे॥

जग सिरमौर बनाएँ भारत,
वह बल विक्रम दे। वह बल विक्रम दे॥

हे हंसवाहिनी ज्ञानदायिनी
अम्ब विमल मति दे। अम्ब विमल मति दे॥

साहस शील हृदय में भर दे,
जीवन त्याग-तपोमर कर दे,
संयम सत्य स्नेह का वर दे,
स्वाभिमान भर दे। स्वाभिमान भर दे॥1॥

हे हंसवाहिनी ज्ञानदायिनी
अम्ब विमल मति दे। अम्ब विमल मति दे॥

लव, कुश, ध्रुव, प्रहलाद बनें हम
मानवता का त्रास हरें हम,
सीता, सावित्री, दुर्गा माँ,
फिर घर-घर भर दे। फिर घर-घर भर दे॥2॥

हे हंसवाहिनी ज्ञानदायिनी
अम्ब विमल मति दे। अम्ब विमल मति दे॥
और भी
निराशा को दूर करता वसंत
सरस्वती पूजन व प्रार्थना
ऋतुराज
रंगता कौन बसंत?
बासंती बसंत की
तुलसीदास और वसंत ऋतु