हँसना-हँसाना भी एक कला होती है। फिर होली का त्योहार तो होता ही इसीलिए है। यहाँ हमने होली पर कुछ चयनित चुटकुले दिए हैं। ये निश्चित ही आपको हँसाएँगे-गुदगुदाएँगे। ईर्ष्यालु पत्नी एक पत्नी बड़ी ईर्ष्यालु थी। जब भी कहीं से उसका पति घर लौटता, तो वह उसकी जाँच-पड़ताल करती। अगर पति के कपड़ों पर कोई बाल भी दिखाई दे जाता तो वह आसमान सिर पर उठा लेती।
एक बार पति के कपड़ों पर बाल का नामोनिशान न देखकर भी वह फूट-फूटकर रोने लगी। बोली- 'तो अब गंजी औरतें भी...।' उन्होंने कपड़े की नई दुकान खोली थी। एक रात उन्होंने सपने में देखा कि एक ग्राहक बीस गज कपड़ा माँग रहा है।
खुश होकर उसने थान से कपड़ा फाड़ना शुरू किया।
तभी पत्नी जाग गई और चिल्लाई, 'क्या कर रहे हो? मेरी साड़ी क्यों फाड़ रहे है?'
वह नींद में बुदबुदाया- 'कम्बख्त बीवी! दुकान में भी पीछा नहीं छोड़ती।' ***** 'मेरा पति...' पति और पत्नी दोनों गहरी नींद ले रहे थे। पत्नी ने नींद में एक ख्वाब देखा कि उसके पति को कोई मार रहा है।
वह हड़बड़ाकर चिल्ला उठी- 'मेरा पति...।'
उसके पहलू में सोया पति यह सुनकर यकायक जाग पड़ा और घबराहट में जल्दी से पिछवाड़े की खिड़की से बाहर कूद गया। ***** रमेश
'डॉक्टर मुझे अपनी पत्नी से डर लगता है। वह सोते-सोते कहने लगती है, 'रमेश नहीं, रमेश नहीं'।
'तो तुम क्यों डरते हो? आखिर मना ही तो करती है।'
'लेकिन यार मैं रमेश नहीं हूँ।' ***** तू-तू, मैं-मैं पति-पत्नी में तू-तू, मैं-मैं हो गई।
पति दिनभर घर से बाहर रहा। शाम को भूख लगी तो उसने समझौता करने के विचार से घर टेलीफोन किया, 'खाने के लिए आज रात क्या बना रही हो?'
गुस्से से भरी बैठी पत्नी ने उत्तर दिया, 'जहर।'
'तो ऐसा करना।' पति बोला- 'मैं जरा देर से लौटूँगा। तुम खा लेना।' ***** नॉनसेंस! पत्नी ने अपने पति से पूछा- 'समझदार आदमी ही सही अर्थों में पति बनते हैं क्या?'
पति ने जवाब दिया- 'नॉनसेंस! समझदार आदमी पति बनते ही नहीं।' ***** मदहोशी क्लोरोफार्म जैसी एक युवा डॉक्टर ने अपनी पत्नी से रोमांटिक मूड में कहा- 'तुम्हारी आँखों में जीवन का टॉनिक है।
जब उदास होता हूँ तो तुम्हारा सामीप्य ऐसा महसूस होता है जैसे आखिरी साँसें गिनते हुए मरीज को ऑक्सीजन मिल जाए... तुम्हारे घने काले बालों में क्लोरोफार्म जैसी मदहोशी है, तुम्हारे...।
पत्नी- 'बस! बस, चुप हो जाओ मैं तुम्हारी पत्नी हूँ, डिस्पेंसरी नहीं।' ***** भगवान के नाम... दौलतरामजी बाजार में घूम रहे थे। उनकी पत्नी उनके साथ थी। तभी एक फटेहाल भिखारी ने कहा- 'बाबूजी, भूख लगी है भगवान के नाम पर...।'
दौलतरामजी ने भिखारी से पूछा- 'तुम जुआ खेलते हो? शराब पीते हो?'
'जी नहीं।' सटपटाकर भिखारी ने जवाब दिया।
'तब फिर तुम लड़कियों से दोस्ती करते होंगे?'
'जी नहीं।'
दौलतरामजी ने अपनी पत्नी की ओर देखा, हँसकर कहा- 'देखा रूबी। जो लोग ये काम नहीं करते उनकी क्या हालत होती है।'
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