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पहले जान लें वरना फिर मत कहना
होली का भविष्यफल
- डॉ. शिव शर्मा

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नील-गगन के नक्षत्रों के आधार पर, अतिप्राचीन नगरी उज्जयिनी के खगोल और भूगोल-शास्त्री होली के पावन अवसर पर पेश कर रहे हैं, शानदार ज्योतिषीय रिपोर्ट- होली का भविष्यफल। अतः सभी बंधुओं और भाभियों से निवेदन है कि इसका लाभ उठाएँ तथा अपने-अपने गणित और फलित के अनुसार ही चलें। अन्यथा होने वाले प्रभावों के लिए सीना फाड़कर तैयार रहें।

गंजे लोग- सभी गंजत्व-धारी प्राणियों से निवेदन है कि वे होली के अवसर पर टोपी, टोपा या हेलमेट धारण कर घूमें। अपने केशों पर कंघी भी करना हो तो टोपी के अंदर ही हाथ डालकर करें। नकली रंगों से सावधान रहें। ये रंग यदि मस्तिष्क में चले गए सीधे, तो नक्षत्रों के हिसाब से मस्तिष्क-हानि की पूर्ण संभावना है।

परीक्षार्थी- यह होली परीक्षार्थियों के लिए शुभ होगी। परीक्षाएँ प्रारंभ हो गई हैं और वर्षभर तक परीक्षार्थियों को पढ़ने-लिखने का सुअवसर नहीं मिल पाया है। वैसे भी परीक्षा उत्तीर्ण कर लेने से कोई काम-धाम मिलना तो संभव नहीं है। अतः पढ़-लिखकर नवाब बनने की कहावत अब चरितार्थ होने वाली नहीं है। अब तो यदि कबड्डी या क्रिकेट खेलना ही सीख गए तो एक अदद नौकरी मिल जाएगी। अतः परीक्षार्थियों को पढ़ने-लिखने में समय नहीं गँवाना चाहिए। बाजार में वैसे भी प्रश्न मय उत्तरों के छपे-छपाए मिलते हैं।

अतः परीक्षार्थियों के लिए यह होली शुभ है। वे वर्षभर एक अक्षर भी नहीं पढ़े हों, कोई बात नहीं लेकिन परीक्षा अवश्य दें। हमारे भविष्यफल के अनुसार सभी का उच्च अंकों से पास होना सुनिश्चित है। अधिक से अधिक आप यह करें कि हनुमानजी को प्रसाद चढ़ाकर ही परीक्षा भवन में प्रवेश करें। इससे सभी प्रकार की बाधाएँ दूर होंगी। इस वर्ष परीक्षार्थियों का भविष्य बहुत उज्ज्वल नजर आ रहाल है। बस उन्हें थोड़ा कष्ट उठाकर, प्रातः जल्दी उठना है और स्नान-ध्यान कर परीक्षा हॉल तक पहुँचना जरूर है।
  नील-गगन के नक्षत्रों के आधार पर, अतिप्राचीन नगरी उज्जयिनी के खगोल और भूगोल-शास्त्री होली के पावन अवसर पर पेश कर रहे हैं, शानदार ज्योतिषीय रिपोर्ट- होली का भविष्यफल। अतः सभी बंधुओं और भाभियों से निवेदन है कि इसका लाभ उठाएँ।      


राजनेता- राजनीतिज्ञों के लिए यह होली फलदायी प्रतीत नहीं हो रही है। बढ़ती महँगाई से आम लोग काफी त्रस्त हैं। रंग-गुलाल के दामों में भी तीव्र वृद्धि हुई है। टैक्सों की भरमार है। जिन वायदों पर वे चुनाव जीते, पूर्ण नहीं हुए हैं। लोग अपने प्रतिनिधियों को इस होली में रंग-गुलाल न सही तो धूल-धमाल के साथ ही ढूँढेंगे। अतः उन्हें सलाह दी जाती है कि वे इस होली में, अपने घरों में ही बैठे रहें तथा अपने-अपने दलों के घोषणा-पत्रों का सस्वर पाठ करते रहें।

कर्मचारी- कर्मचारियों के लिए भी यह होली शुभ नहीं है। वेतन तो कई माह से मिल नहीं रहा है, अब नौकरी पर भी शनि की महादशा है। अतः किसी भी प्रकार का सरकारी या विभागीय लिफाफा हाथ में न लें। ऑफिस में भी कोई फाइल न खोलें तथा कोई भी कागज बिना वजन के इधर-उधर न खिसकाएँ। हो सके तो कार्यालयों से लंबी छुट्टी ले लें या दफ्तर जाएँ भी तो अपनी कुर्सी पर न बैठें।

पूर्व की तरह अधिक से अधिक समय चाय की कैंटीन में व्यतीत करें। साहबों के लिए यह होली कुछ-कुछ ठीक लगती है। नए वेतनमानों से सर्वाधिक भला तो साहब-वर्ग का ही हुआ है। छँटनी भी नीचे से हो रही है, ऊपर तक आने में कई वर्ष लगेंगे। तब तक साहब रिटायरमेंट ले लेंगे। अतः साहब वर्ग को इस होली में, खूब रंग-गुलाल खेलना चाहिए और हो सके तो अधीनस्थों को होली पर अपने निवास पर बुलवाकर, मिलन-समारोह आयोजित करना चाहिए।
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