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एक-एक राजा की सौ-सौ रानियाँ...
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ऐसी लागी लगन की धुन से शुरू हुई माँ दुर्गा की आराधना में प्रतिभागियों को ऐसी धुन लगी कि उनका रोम-रोम थिरकने लगा। जैसे-जैसे समय बीतने लगा, गरबे का रंग गहराने लगा और इस लोककला के माध्यम से लोग मातारानी की भक्ति में लीन हो गए।

नईदुनिया और रेसकोर्स रोड नवदुर्गोत्सव समिति द्वारा अभय प्रशाल में आयोजित रास-उल्लास के दूसरे दिन ब्राउन कलर थीम पर आयोजित गरबे में प्रतिभागियों के रास और दर्शकों के उल्लास का अद्‍भुत संगम नजर आया।

मुंबई के ताल ग्रुप की ताल पर कभी तेज तो कभी धीमी गति से गरबा करते देख दर्शकों की आँखें फ्लोर पर जम गई थीं। ढोलिया, पंखिड़ा, सांबेलू (धान कूटते वक्त देवरानी-जेठानी की बातचीत) और एक-एक राजा की सौ-सौ रानियाँ जैसे कर्णप्रिय गीत जहाँ कानों में मधुर रस घोल रहे थे, वहीं प्रतिभागियों द्वारा इन गीतों पर बेहतरीन तालमेल के साथ दी गई प्रस्तुति को देख आँखें थकने का नाम ही नहीं ले रही थीं।

तीन राउंड में चले इस कार्यक्रम के पहले राउंड में गणेश देवा करूं थारी सेवा..., करने गरबा रमवा आओ..., सोनल गरबा सीड़े रे अम्बा... आदि गीत आकर्षण का केन्द्र रहे। दूसरे राउंड में ओ रंग रसिया.. और ओढ़नी ओढ़ूँ... जैसे गीतों पर दी गई प्रस्तुती ने दर्शकों का दिल जीत लिया।

तीसरे और अंतिम राउंड में माहौल रास-उल्लास से भर गया। मधुबन में राधा... और मीठे रस से भरियो... आदि गीतों पर दी गई प्रस्तुति से प्रतिभागियों को कृष्ण संग रास रचाते गोप-गोपिकाओं सा आनंद मिल रहा था।

लगातार नौ साल से यहाँ गरबा कर रहे रजत गर्ग ने बताया कि शानदार म्यूजिक और अच्‍छी ट्रेनिंग
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के कारण गरबा करने का मजा दोगुना हो जाता है। एक बार गरबा शुरू होने पर फ्लोर से हटने का मन ही नहीं करता है। चार सालों से ग्रुप बनाकर गरबा खेलने आ रहे नीरज रावत ने बताया कि थीम बेस गरबे का मजा ही कुछ और है।


प्रतिभागियों और दर्शकों के ‍लिए थीम पर आधारित पुरस्कार भी रखे गए हैं। दूसरे दिन के बेस्ट मेल गरबा का पुरस्कार सुमित गगरानी ने जीता, बेस्ट फीमेल गरबा प्रियंका जैन रहीं। अमित चौधरी और शुभानी शर्मा को बेस्ट ड्रेसअप मेल और फीमेल चुना गया जबकि श्रीवास व्यास बेस्ट बॉय और संजना जैन बेस्ट बेबी चुने गए।

उत्साह तो चरम पर था, पर समय की बाध्यता के चलते प्रतिभागियों ने अगले दिन फिर उसी उत्साह और ऊर्जा के साथ गरबे करने का वादा करते हुए एक-दूसरे से विदा ली।
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