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Laxmi pujan
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दीपावली पूजन मुहूर्त दीपदानादि के लिए कार्तिक अमावस्या में प्रदोषकाल एवं अर्धरात्रि व्यापिनी हो तो विशेष प्रशस्त माना गया है। प्रस्तुत वर्ष कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या का संयोग दो दिन हो रहा है। 17 अक्टूबर शनिवार को चतुर्दशी 12.37 तक है व 18 अक्टूबर रविवार को अमावस्या प्रातः 11.03 तक है।

प्रातःकाल में अमावस्या न होने से लक्ष्मी पूजन के मुहूर्त नहीं है। यदि अपने संस्थान में दिन को पूजन करना हो तो वे 1.44 से 3.18 तक व 3.18 से 4.52 तक अमृत होने से अपनी सुविधानुसार पूजन कार सकते हैं। 17 अक्टूबर शनिवार की अमावस्या एवं हस्त नक्षत्र परन्तु प्रदोषकाल के बाद रात्रि को चित्रा नक्षत्रकालीन, वैघृति योग में होगा। इस दिन शुभ चौघड़िए में रात्रि 7.50 से वृषभ लग्न कुंभ नवांश 8.00 तक है व प्रदोष व्यापनी अमावस्या होने से यह समय लक्ष्मी पूजन हेतु श्रेष्ठ है।

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वैसे वृषभ लग्न रात्रि 9.33 तक रहेगा। निशिथकाल 8.18 से 10.42 तक फिर महानिशिथकाल 10.42 से मध्य रात्रि 1.06 तक रहेगा। निशिथकाल व महानिशिथकाल रोग व उद्वेग के चौघड़िए में हैं। निशिथकाल व महानिशिथकाल में तंत्र, मंत्रादि का जाप करना ठीक रहता है। वैसे लक्ष्मी मंत्रों का जाप उत्तम चौघड़िया के न होने से ठीक नहीं रहता। उपरोक्त सभी मुहूर्त इन्दौर के अक्षांश व रेखांश पर आधारित हैं।
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