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नाड़ी ज्योतिष के जरिए जानिए अपना भविष्य
ताड़पत्रों पर संग्रहित भारत की प्राचीन ज्योतिष विद्या
के. अय्यानाथन
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कल क्या होगा? क्या हम तरक्की करेंगेबच्चे का स्वास्थ्य तो ठीक होगा न जाने ऐसी कितनी ही बातें हैं, जिन्हें हम जानना-समझना चाहते हैं। वर्तमान में रहते हुए भविष्य के गर्भ में छिपे राज जानना चाहते हैं और इसके लिए ज्योतिषियों के चक्कर काटते हैं।

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जी हाँ, भविष्य के विषय में जानने की इच्छा आखिर किसकी नहीं होती होगी? भविष्य जानने की चाह किसी को भी ज्योतिषी के पास जाने के लिए मजबूर करती है। इसलिए इस बार आस्था और अंधविश्वास की अपनी विशेष प्रस्तुति में हम आपके सामने लाए हैं दक्षिण भारत की ज्योतिष विज्ञान की एक प्रमुख विधा ‘नाड़ी ज्योति’, जो प्राचीनकाल से ज्योतिष शास्त्र में अपना अलग स्थान रखती है। इस विधा को जानने वाले दावा करते हैं कि इसके जरिए किसी भी व्यक्ति का अतीत, वर्तमान और भविष्य पता किया जा सकता है

हजारों वर्ष पहले अति विद्वान साधु-संतों में संपूर्ण ब्रह्मांड के सभी जीवों का जीवन-काल (भूत और भविष्य) का विवरण ज्ञात करने की शक्ति थी। उन्होंने अपने इस विशिष्ट ज्ञान को प्राचीन तमिल भाषा की लिपि में ताड़-पत्रों में सुरक्षित रखा है।
माना जाता है कि ये ताड़-पत्र करीब 2,000 साल पुराने हैं। किसी भी व्यक्ति के अतीत और भविष्य को जानने का अनोखा तरीका है - नाड़ी ज्योतिष। ज्योतिषियों के अनुसार बहुत सारे विदेशी मुख्य रूप से जापानी लोग भी हमारे केंद्रों में भविष्य जानने आते हैं। किसी भी व्यक्ति को उसके जीवन के प्रत्येक क्षण की सटीक जानकारी देने की यह विधा उन्हें बहुत प्रभावित करती है।


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‘नाड़’ शब्द का तमिल में अभिप्राय ‘खो’ है। इस विधा का नाम ‘नाड़’ इसलिए है, क्योंकि कोई भी व्यक्ति अपने व्यक्तिगत जीवन के विषय में सारी खोजों का निष्कर्ष अपनी ही नाड़ी में प्राप्त करता है।

ताड़-पत्रों पर लिखे ये अभिलेख भारतवर्ष के कोने-कोने में पाए जाते हैं। इनमें से कुछ अभिलेख तमिलनाडु में मिले, जिसके गहन अध्ययन से पता चला कि ये अभिलेख दक्षिण भारत के प्रसिद्ध चोल वंश के काल में लगभग हजार साल पहले बनवाए गए थे।

प्रत्येक ‘नाड़’ प्राचीन तमिल भाषा की लिपि में बनाई गई है। इन ताड़-पत्रों को सुरक्षित रखने के लिए इनके ऊपर मोर पंखों के तेल का लेप लगाया जाता है। इस तेल के कारण ही यह ताड़-पत्र हजारों साल बाद भी अभी तक संरक्षित हैं। वर्तमान में सबसे प्राचीन ताड़-पत्र तमिलनाडु के तंजौर जिले के सरस्वती महल संग्रहालय में संरक्षित हैं।

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समय गुजरने के साथ-साथ इस संग्रहालय में रखे हुए कई ताड़-पत्र नष्ट हो गए। वहीं अँग्रेजों द्वारा करवाई गई कुछ ताड़-पत्रों की नीलामी में वैथीश्वरन मंदिर के कुछ परिवारों ने इन पत्रों को खरीदकर इनका अध्ययन किया। फिर उनकी पीढ़ियों ने इस काम को पुरखों का आशीर्वाद मानकर आगे बढ़ाया।
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