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इलाज का अजीबोगरीब तरीका- चाचवा
जिसमें रोगी के शरीर को गर्म सलाखों से दागते हैं...
श्रुति अग्रवाल
Shruti AgrawalWD
आस्था और अंधविश्वास नामक हमारी विशेष प्रस्तुति में हमने अभी तक समाज में फैले अनेक अंधविश्वासों से आपको रूबरू कराया है... जिनमें से अनेक इलाज से संबंधित हैं... वैसे भी जब व्यक्ति बीमारी के लिए लाख जतन करके हार जाता है तो नीम-हकीम या बाबाओं के चक्कर काटने लगता है। हम अपने सुधी पाठकों से निवेदन करते हैं कि वे ऐसे नीम-हकीम लोगों से दूर रहें... हमारी कोशिश आपको समाज में फैले अंधविश्वास से जागरूक कर उनसे बचाने की है...
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अपनी इस पहल को आगे बढ़ाते हुए इस कड़ी में हम आपको रूबरू करवा रहे हैं, मध्यप्रदेश के गाँव-देहात में इलाज के नाम पर फैले अंधविश्वास से। इलाज की इस दर्दनाक पद्धति को चाचवा कहा जाता है... जिसमें मरीज के शरीर को गर्म सलाखों से दागा जाता है...
बूढ़े हों या जवान, यहाँ तक ‍िक नवजात भी, हर एक को यहाँ चाचवे लगाए जाते हैं। अंबाराम का दावा है कि तकलीफ की जगह चाचवे लगाने से मरीज को दर्द नहीं होता... लेकिन बुजुर्गों की चीख और बच्चों का करुण रुदन उनके इस दावे को सिरे से खारिज कर रहा था।
इलाज की यह पद्धति मध्यप्रदेश के विदिशा, खंडवा, बैतूल, धार, ग्वालियर. भिंड-मुरैना जैसे शहरों के ग्रामीण अंचलों में फैली हुई है। इस पद्धति से इलाज करने वाले व्यक्ति को गाँव वाले बाबा के नाम से संबोधित करते हैं... इस इलाज में सबसे पहले मरीज के शरीर के व्याधिग्रस्त हिस्से पर भभूत (राख) से चिन्ह बनाए जाते हैं। फिर इन चिन्हों को गर्म सलाखों से जलाया जाता है। बाबा का दावा है कि ऐसा करने से मरीज की व्याधियाँ दूर हो जाती हैं...


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यह जानकारी मिलने के बाद हमने मोखा पिपल्लिया गाँव के ऐसे ही एक चाचवा बाबा अम्बारामजी से संपर्क किया। अम्बाराम ने हमें बताया कि वे बीस सालों से यही काम कर रहे हैं। उनसे पहले उनके पिताजी चाचवे के द्वारा लोगों का इलाज करते थे। अंबाराम का दावा है कि वे पेट दर्द, गैस, बवासीर, मस्सा, टीबी, साइटिका से लेकर लीवर संबंधी सारी बीमारियों का इलाज चाचवा लगाकर कर सकते हैं।

अंबाराम का कहना है कि चाचवा लगाने से व्यक्ति के शरीर की व्याधियाँ जल जाती हैं। अंबाराम के इन्हीं दावों से वशीभूत होकर लोग उन्हें डॉक्टर साहब तक कहकर पुकारते हैं। कई मरीज तो ऐसे हैं, जिन्होंने कई बार इनसे चाचवा लगवाया है। इन्हीं में से एक अमरसिंह
अब तक ग्यारह बार चाचवे लगवा चुके हैं। अमरसिंह का कहना है कि चाचवा लगवाते ही उन्हें आराम हो जाता है। वे पेटदर्द, सिरदर्द और लीवर से संबंधित बीमारियों के चलते चाचवा लगवा चुके हैं। अपनी बात का प्रमाण देने के लिए चंदरसिंह ने हमें उनके पेट, सिर और छाती में लगे चाचवे के निशान बताए।

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गोदने की तरह चाचवे का निशान भी एक बार लगवाने के बाद जिंदगी भर तक आपका साथ निभाता है। अंबाराम मरीज के गले, सिर, पेट से लेकर शरीर के जिस भी हिस्से में तकलीफ होती है, चाचवा लगा देते हैं। यहाँ आए अधिकांश लोगों के शरीर पर हमने चाचवे के पुराने निशान देखे, जो इस बात की गवाही दे रहे थे कि अंबाराम के पास लोग बार-बार चाचवे लगवाने आते हैं।
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