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स्पर्श से भगाएँ रोग...
ब्रह्मांड शक्ति से चिकित्सा की अनोखी रीति
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ब्रह्मतीर्थ- रवि मास्टर आगंतुकों को साल में एक बार ‘ब्रह्मतीर्’ नामक पवित्र जल देते हैं। वे विशेष समय में रोगियों का उपचार करते हैं। वे बताते हैं कि उन्हें अपने स्वयंभू दीपक से इन खास दिनों के निर्देश मिलते हैं, जिसे वे अपने अनुयायियों को बता देते हैं। इन खास दिनों में नवग्रहों की अद्भुत शक्ति ब्रह्मगुरु के शरीर में केंद्रित हो जाती है, जिसे वे जल में विसर्जित करते हैं। यह जल इस दीपक के सामने रखा होता है। रवि मास्टर इस जल को अपने अनुयायियों में बाँट देते है। माना जाता है कि इस पवित्र जल के सेवन से लोग नकारात्मक ऊर्जा से दूर रहते हैं

जो लोग इस दैविक जल का सेवन करते हैं, उनके सारे पाप धुल जाते हैं और वे पूर्ण स्वस्थ हो जाते हैं। उन्हें उनके सभी रोगों से छुटकारा मिलता है। ब्रह्मगुरु के अनुसार मृत्यु के उपरांत भी जीवन है। मौत के बाद कुछ आत्माएँ काली शक्तियों के वश में हो जाती हैं, जिसे हम नरक कहते हैं और कुछ चंद्र मंडल में रहती हैं, जिसे हम स्वर्ग कहते हैं। जो लोग इस पवित्र जल को ग्रहण करते हैं, उनके परिवारजनों को किसी भी तरह का क्रिया-कर्म नहीं करना पड़ता है। उनकी आत्माओं को काली शक्तियाँ नहीं छू सकती हैं और वे स्वर्ग ही पहुँचते हैं।

हमारे सामने ऐसे कई उदाहरण हैं, जिनसे उनके उपचार की क्षमता का पता चलता है, परंतु आधुनिक विज्ञान ऐसी किसी भी शक्ति को प्रामाणिक नहीं मानता है। उनके पास आने वाले लोगों का मानना है कि यह भी एक तरह की वैकल्पिक दवा है। हीलिंग के जरिये असाध्य रोगों से छुटकारा पाया जा सकता है। आपको क्या लगता है? क्या आप मानते हैं कि स्पर्श या पवित्र जल का सेवन करने से हर तरह की बीमारी का उपचार किया जा सकता है।
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