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फर्शी है या स्टेथेस्कोप
एड्स जैसे लाइलाज रोग ठीक करने का दावा
Shruti AgrawalWD
हमने जब फर्शी का राज पूछा तो रघुनाथजी ने कहा- यह मेरे गुरु का आशीर्वाद है। मैं लंबे समय तक वनवासियों के बीच रहा हूँ उन्हीं लोगों से मैंने कई दुर्लभ जड़ी-बूटियों के बारे में जानकारी प्राप्त की है जिसका मैं इलाज के दौरान उपयोग करता हूँ। जब हमने उनसे पूछा कि यदि उनके दावे में सचाई है तो वे अपनी जानकारी को पेटेंट क्यों नहीं कराते? अपने दावों को सरकारी मदद से पुष्ट करने की कोशिश अभी तक क्यों नहीं की गई? हमारे इन सवालों को वे अपनी गोल-मोल बातों में टालने की कोशिश करते रहे।

रघुनाथजी का कहना था कि वे कैक्टस से एक ताबीज बनाते हैं जो रोगी की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ा देता है वहीं वे जो आयुर्वेदिक दवाइयाँ देते हैं वे रोगी के रोग को जड़ से खत्म कर देती हैं।

Shruti AgrawalWD
रघुनाथजी से बातचीत करने के बाद हमने यहाँ आने वाले मरीजों से उनके यहाँ आने का कारण पूछा। अधिकांश मरीज यहाँ पहली बार ही आए थे। पहचान छुपाने के वादे के बाद मुंबई से आए एक युवा ने बताया कि उसे एड्स है। वह जानता है कि यह एक लाइलाज बीमारी है लेकिन मेरे एक दोस्त ने बताया था कि बप्पाजी के पास इसका इलाज है इसलिए आया हूँ। उम्मीद पर दुनिया टिकी है बस मैं भी उम्मीद की डोर बाँधे यहाँ आया हूँ।

इस युवक की ही तरह बालाजी शेखावत, ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित अपनी बच्ची का इलाज कराने यहाँ आए थे। बालाजी ने हमें बताया कि उनकी कंपनी में काम करने वाले एक व्यक्ति को भी डॉक्टर ने ब्रेन ट्यूमर बताया था, यहाँ से इलाज कराने के बाद वह बिलकुल ठीक हो गया। अब हम भी इसी उम्मीद में आए हैं कि हमारी बच्ची ठीक हो जाए।

Shruti AgrawalWD
इसी उम्मीद के सहारे हजारों लोग रघुनाथजी के आश्रम में आए थे। लेकिन हमने अपनी जाँच-पड़ताल के दौरान कुछ अजीब सी बातें देखीं जैसे रघुनाथजी का दावा था कि सत्तर के आँकड़े के बेहद करीब हैं और अभी भी चालीस-पैंतालीस के लगते हैं जबकि उनके बड़े बेटे ने कुछ समय पहले ही बीस का आँकड़ा पार किया है। वहीं यहाँ आने वाले हर मरीज को एक सी दवाई दी जा रही थी। अब जो दवा अस्थमा ठीक कर सकती है, वह कैंसर या एड्स कैसे ठीक करेगी? इसका जवाब उनके या उनके सहयोगियों के पास नहीं था। इसी तरह तेल और तावीज भी एक ही सा दिया जा रहा था जिसे देखकर लग रहा था कि यहाँ भी भोले-भाले लोगों को ठगने का गोरखधंधा ही चल रहा है।

आखिर क्या है मामला ?
अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के कार्याध्यक्ष डॉ. नरेंद्र दाभोलकर ने फर्शी वाले बाबा के ऊपर आरोप लगाया है कि वे प्रशिक्षित डॉक्टर नहीं हैं... फिर कैसे लोगों का उपचार कर रहे हैं। उन्होंने इस तथ्य को लेकर 21 अप्रैल 2006 में फर्शी वाले बाबा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी लेकिन इस पर अभी तक कोई करावाई नहीं हुई है।
Shruti AgrawalWD
इस संबंध में उन्होंने हाल ही में नासिक के आयटक हॉल में एक पत्रकार वार्ता आयोजित की थी। इस पत्रकार वार्ता में डॉ. दभोलकर कहा क
ि, त्र्यंबकेश्वर में रहने वाले फर्शी वाले बाबा भोले-भाले लोगों को फँसाकर उन्हें दिग्भ्रमित करते हैं। इसी मामले में उनके खिलाफ 21 अप्रैल 06 को त्र्यंबकेश्वर तहसील के स्वास्थ अधिकारी डॉ. राजेंद्र जोशी ने मामला दर्ज किया था। एफआईआर को एक साल और तीन महीने पूरे होने बावजूद कोई भी कारवाई नहीं की गई। अब उनकी समिति ने इस बाबद प्रशासकीय स्तर पर आंदोलन करने का निर्णय किया है।
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