आलेख | चौघड़िया | तंत्र-मंत्र-यंत्र | पत्रिका मिलान | रत्न विज्ञान | टैरो भविष्यवाणी | ज्योतिष सीखें | सितारों के सितारे | दैनिक राशिफल | नक्षत्र | जन्मकुंडली | आज का मुहूर्त | जन्मदिन | राशियाँ | नवग्रह | वास्तु-फेंगशुई | रामशलाका
मुख पृष्ठ धर्म-संसार » ज्योतिष » तंत्र-मंत्र-यंत्र » मंत्रों के चमत्कारी प्रभाव
तंत्र-मंत्र-यंत्र
Feedback Print Bookmark and Share
 
- पं. जया ठाकुर
ND

मनुष्य जब से बोलने लगता है, उसका स्वर, उच्चारण, बोलने की क्रिया, बोलते समय के हाव-भाव, बोलने की शक्ति तीव्र या धीमी या लय वाली आदि दिखती है। यहीं से ध्वनि का संसार विकसित होता है, जो सर्वश्रेष्ठ शक्ति की सत्ता है। बोलने की शक्ति ही मनुष्य को संसार में निकृष्ट, उत्कृष्ट अथवा सर्वश्रेष्ठ बनाती है। इसके प्रमाण हमें पुराणों व इतिहास में मिलते हैं।

वैज्ञानिक तथ्यों से देखें तो हमें ज्ञात होगा कि ध्वनि की क्षमता अद्भुत है। जिस तरह दो स्थूल तत्वों को, दो अणुओं को बारंबार घर्षित करते हैं, तो उसमें ऊर्जा उत्पन्न होती है, उसी तरह इसके नियमित प्रयोग से वे कार्य संपन्न होते हैं, जो असंभव होते हैं।

ये मंत्र मुर्दे में भी जान डाल देते हैं। इसी ध्वनि को मंत्रों के रूप में बार-बार उच्चारित करने से समग्र संसार ब्रह्मांड अलौकिक सत्ता के अंदर समाहित हो जाता है। वेदों में मंत्र को सर्वोच्च सत्ता एवं ब्रह्म के समान माना गया है। हमारे जीवन में जो कुछ घटित होता है, उसके मूल में मंत्रों की सत्ता विद्यमान है।
संसारी व्यक्तियों को, जो भौतिक सुख-सुविधा, वैभव व ऐश्वर्य चाहते हैं, विष्णु मंत्र : ॐ नमो नारायणाय का जप 108 बार करना चाहिए, जिसके फलस्वरूप कुटुम्ब में प्रसन्नता आती है। आर्थिक रूप से संपन्नता आती है।


ईश्वर की स्तुति मंत्रों से, श्लोकों से अथवा स्तोत्रों से करने वालों का सदा कल्याण होता है। वहीं दिनभर गाली-गलौज व अपशब्दों का प्रयोग करने वाला नित्य निम्न से निम्नतर होता जाता है। नाली के कीड़ों की तरह जीवन हो जाता है।

अब यह मनुष्य पर निर्भर करता है कि वह कैसा जीवन चाहता है। संसारी व्यक्तियों को, जो भौतिक सुख-सुविधा, वैभव व ऐश्वर्य चाहते हैं, विष्णु मंत्र का जप 108 बार करना चाहिए, जिसके फलस्वरूप कुटुम्ब में प्रसन्नता आती है। आर्थिक रूप से संपन्नता आती है।

विष्णु मंत्र : ॐ नमो नारायणाय

विधि : विष्णु-लक्ष्मी की तस्वीर अथवा मूर्ति अथवा यंत्र की पंचोपचार से पूजा करना। पश्चात कुश के आसन पर बैठकर तुलसी की माला को शुद्ध कर उससे जप करना चाहिए।