प्रस्तुत जन्मकुंडली अपने समय के जाने-माने सितारे राजेश खन्ना की है। राजेश खन्ना को हाल ही में दादा साहेब फालके अवार्ड से सम्मानित किया गया है। मिथुन लग्न की यह कुंडली अपार सफलता को तो दर्शाती है किंतु सप्तम स्थान में सूर्य की उपस्थिति पत्नी से पृथक करवाती है।
हालाँकि सप्तम स्थान में बुधादित्य योग और शुक्र के होने से पत्नी भी कला जगत से जुड़ी जानी-मानी हस्ती है। मंगल छठे स्थान में स्वग्रही है जो कि सातवीं दृष्टि से व्यय स्थान में स्थित वृषभ के शनि को देखता है। आठवीं दृष्टि लग्न में डालता है। वहाँ बृहस्पति स्थित है। इस कुंडली के अनुसार मंगल उनके दो स्थान एकादश और छठे स्थान का स्वामी है जो शुभदायक नहीं है।
कर्म स्थान का स्वामी गुरु लग्न में स्थित है, जो अत्यंत शुभ है। आगामी समय में राजेश खन्ना के सितारे फिर चमक सकते हैं किंतु उससे पहले अचानक किसी विवाद में उनका नाम उछल सकता है। | | राजेश खन्ना को हाल ही में दादा साहेब फालके अवार्ड से सम्मानित किया गया है। मिथुन लग्न की यह कुंडली अपार सफलता को तो दर्शाती है किंतु सप्तम स्थान में सूर्य की उपस्थिति पत्नी से पृथक करवाती है। |
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उन्हें अपने वजन के बराबर सप्तधान तुलवाकर गरीबों में बँटवाना शुभ फलदायी रहेगा। उन्हें हरे वस्त्र या हरी कोई भी वस्तु दान/उपहार में नहीं लेनी चाहिए। व्यय स्थान में शनि भाग्य स्थान का स्वामी है। अत: शनि की आराधना भी उत्तम फल प्रदान करेगी। कुल मिलाकर यह उतार-चढ़ाव से भरी जिंदगी दर्शाती कुंडली है।
इस कुंडली में गुरु लग्न में है। ऐसी स्थिति में बैठा गुरु पत्रिका के एक लाख दोष दूर कर देता है। साथ ही गुरु को स्थान-दोष भी प्राप्त है। वह जहाँ बैठता है उसी स्थान को बड़ा कर देता है, किंतु उसकी पाँचवीं, सातवीं और नौंवी दृष्टि शुभ होती है।
इस कुंडली में छठे स्थान के स्वग्रही मंगल चौथी दृष्टि से भाग्य स्थान को, सातवीं दृष्टि से व्यय स्थान और आठवीं दृष्टि से लग्न को देखते हैं औ विपरीत असरकारी बन रहे हैं।
तृतीय स्थान में स्थित राहु भ्रमपूर्ण स्थिति बना रहे हैं। इस स्थान में विराजित राहु जीवन में भटकाता बहुत है। यह भटकाव मानसिक या भावनात्मक सुख को लेकर भी हो सकता है। अर्श से फर्श की स्थिति दर्शाती यह कुंडली अस्थिरता और असमंजस की स्थिति निर्मित करती है किंतु दशा विशेष में अपार लोकप्रियता और फिर अचानक हाशिए पर आ जाने के योग भी इसी कुंडली में बने हुए हैं।
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