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तीन साल देगा गुरु सनत जयसूर्या का साथ
पं. अशोक पँवार 'मयंक'
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श्रीलंका के पिंच हिटर सनत जयसूर्या का जन्म 30 जून 1969 को सिंह लग्न में हुआ। आपकी जन्म राशि धनु है। जन्म तारीख के अनुसार 30 तारीख का अंक गुरु प्रधान है। राशि भी गुरु प्रधान धनु है। आपके जन्म लग्न में गुरु पंचमेश व अष्टमेश होकर द्वितीय धन, वाणी भाव में विराजमान है।

आपकी पत्रिका में चन्द्र लग्न से गुरु केंद्र में होने से गजकेसरी योग बनता है। आपकी पत्रिका में प्रतिष्ठा के अनेक योग हैं, जिनमें पूर्णिमा योग सूर्य-चंद्र के आपके सामने से बन रहा है। जब इतने योग हों तो ऐसा जातक धनवान, कीर्तिवान, यशस्वी होता है। खेल जगत का कारक मंगल आपकी पत्रिका में भाग्येश होकर चतुर्थ जनता भूमि भवन भाव में स्वराशिस्थ होकर बैठा है। मंगल रूचक योग बना रहा है। ऐसे जातक साहसी, पराक्रमी होते हैं।

क्रिकेट जमीन से जुड़ा खेल है। मंगल खेल का ही कारक है, जो जमीन भाव में बैठा है व जनता भाव में होने से आपकी ख्याति क्रिकेट जगत में हुई। राशि स्वामी पंचमेश द्वितीय धन वाणी भाव में होकर गुरु की राशि मीन को अष्टमेश पर सप्तम दृष्टि स्वदृष्टि पड़ने से खेल जगत में सिरमौर न सही एक अच्छे खिलाड़ी के रूप में हैं। लग्नेश सूर्य एकादश आय भाव में होकर बुध की मिथुन राशि मित्र राशि में है जो पूर्णिमा योग बना रहा है।
  श्रीलंका के पिंच हिटर सनत जयसूर्या का जन्म 30 जून 1969 को सिंह लग्न में हुआ। आपकी जन्म राशि धनु है। जन्म तारीख के अनुसार 30 तारीख का अंक गुरु प्रधान है। राशि भी गुरु प्रधान धनु है।      


ऐसे जातक स्वप्रयत्नों के यशस्वी बनते हैं। शुक्र दशमेश व तृतीयेश होकर भाग्य में नीच के शनि के साथ है। जिसकी स्वदृष्टि व उच्च दृष्टि शुक्र व शनि की पड़ने से पराक्रम बड़ा-चढ़ा रहता है। शनि की षष्ठ भाव पर स्वदृष्टि व गुरु की नीच पंचम दृष्टि मिले-जुले परिणाम का सूचक होता है। कभी अच्छी सफलता तो कभी विफलता भी हाथ लगती है।

आपने क्रिकेट करियर में श्रीलंका बी टीम से खेलना प्रारंभ किया। 1990 में पहला टेस्ट मैच खेला लेकिन इस समय आपको द्वितीयेश व एकादशेश बुध का अंतर चल रहा था, जो भाग्यवर्धक नहीं कहा जा सकता। आपको 95 से मंगल की महादशा लगी जो भाग्यवर्धक रही। इसी दशा में आपने कई कीर्तिमान स्थापित किए और ख्याति पाई।

97 तक 131 एक दिवसीय मैचों में 3000 रन व 100 विकेट तथा 151 का व्यक्तिगत स्कोर तथा कई तेज शतक शामिल थे। 1997 में 1000 रन व भारत के विरुद्ध 340 रन और दूसरे विकेट के लिए 576 रन की साझेदारी का कारनामा कर मंगल की महादशा में आपने दिखा डाला। अभी वर्तमान में गुरु का गोचरी भ्रमण धनु से चल रहा है, जो पंचम से है। आपके तीन वर्ष खेल जगत में महत्वपूर्ण होकर कुछ चमत्कार की आशा रखते हैं।
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