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प्रकाशसिंह बादल का कार्यकाल पूरा होगा
पं. अशोक पँवार 'मयंक'
PTI
पंजाब के वर्तमान प्रधानमंत्री प्रकाशसिंह बादल का जन्म 8-12-1927 को सरदार रघुराजसिंह बादल के यहाँ वृषभ राशि, रोहिणी नक्षत्र, सिद्ध योग में हुआ। वृषभ राशि वाले मस्तमौला स्वभाव के, भावनात्मक प्रवृत्ति वाले, उत्तम कद-काठी के होते हैं।

नक्षत्र स्वामी चंद्रमा उच्च का होने से वे स्वच्छ व साफ-सुथरी छवि वाले इनसान हैं। राशि स्वामी शुक्र आपकी चंद्र लग्न में स्वराशिस्थ होकर षष्‍ट भाव में है। अत: सोशल वर्कर होने के साथ एक कृषक परिवार से भी हैं। रहा राजनीति का सवाल तो वे 1947 से ही विधायक रहकर यूनियन मिनिस्टर रहे।

उनका जन्म समय गुरु स्वराशि मीन में था, जो आपको सोचने-समझने की शक्ति के साथ उत्तम सूझबूझ देने वाला भी बनाता है। चूँकि चंद्र लग्न से देखा जाए तो गुरु की पंचम दृष्टि तृतीय पराक्रम पर पड़ रही है। वहीं चंद्र उच्च का होकर उच्च राहु के साथ म‍तांतर में है।
  पंजाब के वर्तमान प्रधानमंत्री प्रकाशसिंह बादल का जन्म 8-12-1927 को सरदार रघुराजसिंह बादल के यहाँ वृषभ राशि, रोहिणी नक्षत्र, सिद्ध योग में हुआ। वृषभ राशि वाले मस्तमौला स्वभाव के, भावनात्मक प्रवृत्ति वाले, उत्तम कद-काठी के होते हैं।      
गुरु की नवम मंगल ‍की वृश्‍चिक राशि पर बैठे जनता, भूमि-भवन के कारक सूर्य द्वादेश व सप्तमेश मंगल पर व पंचमेश धनेश बुध पर कर्मेश भाग्येश व भाग्येश शनि पर पड़ रही है। गुरु-मंगल का दृष्टि संबंध इस जातक को साहसी बना देता है।


चंद्र लग्न से आपकी पत्रिका में अखंडलक्ष्मी योग चंद्र मंगल के दृष्‍टि संबंध से बन रहा है। वहीं अध्यात्म व परोपकारी योग शनि चंद्र के दृष्टि संबंध से भी बना। प्रतापी योग सूर्य-चंद्र के दृष्‍टि संबंध से पूर्णिमा योग भी बन रहा है।

यहाँ पर शनि-मंगल का विस्फोटक योग भी है, जो कभी-कभी बाधा का कारण भी बनता है। मंगल स्वराशि का होने से शनि का प्रभाव कम ही रहता है, फिर भी उन्हें सत्ता पाने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा। वर्तमान में गुरु की कृपा उन पर बनी है, जो जन्म समय गुरु स्वराशि का है तो गोचर में भी गुरु धनु राशि में चल रहा है।

शनि गोचर में सिंह राशि का होकर चंद्र लग्न से चतुर्थ भाव में है, जिसकी तृतीय दृष्टि उच्च षष्ट भाव पर पड़ रही है। अत: शनि के सिंह में रहने तक उनके शत्रु पराजित होते रहेंगे। शनि की सप्तम दृष्टि स्वदृष्टि दशम भाव पर पड़ने से सत्ता पक्ष में कोई खतरे वाली बात नहीं है। चंद्र लग्न से भाग्येश व कर्मेश शनि की दृष्‍टि पर होने से भी भाग्यबल में वृद्धि मिल रही‍है, वहीं गोचर से भी लग्न पर मित्र दृष्टि पड़ रही है। कुल मिलाकर देखा जाए तो उनके सितारे अभी तो बुलंद ही रहेंगे।
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