(6) छठा खाना : कड़वा या खारा पानी। इस पानी का क्या असर होगा यह कहा नहीं जा सकता अर्थात यहाँ स्थित चंद्र का असर दूसरे ग्रहों पर निर्भर है। यदि केतु अशुभ है तो चाँदी की कीमत भी मिट्टी हो जाएगी।
सावधानी : रात में दूध पीना जहर समान।
(7) सातवाँ खाना : खेत में सिंचाई करने वाली नहर या नदी का पानी। मौत घर में ही होगी। काव्य और ज्योतिष में रुचि लेने वाला। लक्ष्मी का वरदान।
सावधानी : शादी की शर्त यह कि शिक्षा पूरी हो या पूरी मानकर रोक दी जाए।
(8) आठवाँ खाना : अमृत जैसा पानी नहीं है तो फिर जहर समझो, लेकिन सामान्य पानी की ग्यारंटी नहीं। पढ़ाई होगी तो पूरी होगी अन्यथा पुत्र को भी पढ़ने से रोकते रहेंगे। यह भी हो सकता है कि दोनों को ही तरसते रहें।
सावधानी : घर में चाँदी की चीजें रखें। माता के पैर छुएँ।
(9) नौवाँ खाना : यह एक समुद्र है। यह घड़ा भर मोती के समान है। पढ़ाई का पूरा-पूरा लाभ। ऐसा दानशील व्यक्ति दूसरों का रक्षक होता है।
सावधानी : धर्म-कर्म में विश्वास रखना जरूरी अन्यथा राहु यदि मंदा है तो समुद्र में तूफान ला देगा।
(10) दसवाँ खाना : जहरीला पानी या पहाड़ी की रुकावट से बंद पड़ा पानी। आँकड़े के दूध समान। दूसरों को भी नहीं पढ़ने देना और खुद भी नहीं पढ़ेगा। दवाई के कार्य में लाभ हो सकता है।
सावधानी : प्रेमिका या विधवा स्त्री से सावधान रहें। जमीन का पानी घर में रखें।
(11) ग्यारहवाँ खाना : बरसाती नाला या खूनी कुआँ। अनपढ़ मगर विद्वान। व्यक्ति कार्यकुशल और धनवान होता है। इसकी शुभता से साहस बढ़ता है।
सावधानी : शनि शुभ हो तो दूध का दान देने से शुभ असर।
(12) बारहवाँ खाना : आसमानी पानी या बर्फ। रात के वक्त का तूफान जिससे बस्तियाँ उजड़ें। शिक्षा की कीमत हो या नहीं लेकिन दुकानदारी में महारत होगी।
सावधानी : वर्षा का जल घर में रखें। ससुराल की जायदाद का लोभ न रखें। पत्नी से संबंध अच्छे रखें।