शनि ग्रह का चक्र

शनि के शुभ-अशुभ प्रभाव
सावधानी : मकान न बनवाएँ बल्कि बने-बनाए खरीद लें या परदादाओं के मकान में ही रहें। दस बादाम धर्म स्थान पर चढ़ाएँ और उसमें से पाँच लाकर घर में रखें। शनि के मंदे कार्य अर्थात जुआ, सट्टा, शराब, वेश्या से संपर्क और ब्याज का धंधा आदि न करें।(6).
छठा खाना : किस्मत लिखने का मालिक। भैंस पालना या दूध का धंधा लाभदायक हो सकता है। सम्पत्ति, यश और अधिकार में से कोई एक चीज ही मिलेगी।सावधानी : मकान न बनवाएँ। शराब न पिएँ।(7).
सातवाँ खाना : यहाँ स्थित शनि को कलमकार कहा गया है। जीवन साथी मिलने में देरी हो सकती है।सावधानी : पराई स्त्री के मोह में न रहें। बाप-दादाओं के मकान में ही रहें। शराब न पिएँ।(8).
आठवाँ खाना : यह शनि का मुख्यालय है। व्यक्ति दीर्घायु होता है। सावधानी : शनि के मंदे कार्य अर्थात जुआ, सट्टा, शराब, वेश्या से संपर्क और ब्याज का धंधा आदि न करें।(9).
नवम खाना : यदि यहाँ शनि है तो व्यक्ति ऊँचे दर्जे का शिक्षित होगा। प्रकांड पंडित माना जाएगा। भरापूरा परिवार होगा। आक का दरख्त। सावधानी : दो से ज्यादा मकान न रखें। अँधेरी कोठरी में रोशनदान या रोशनी के रास्ते न बनाएँ।(10).
दसवाँ खाना : यहाँ स्थित शनि को कोरा कागज समझो अर्थात तुमने उस पर जैसा लिख दिया वैसा जीवन हो जाएगा। किस्मत को जगाने वाला, लेकिन शर्त यह कि शनि के मंदे कार्य न करें।सावधानी : दूसरों का भला करने की न सोंचे। धर्मात्मा बनने से काम नहीं चलेगा। शराब कतई न पिएँ।(11).
ग्यारहवाँ खाना : यदि यहाँ शनि है तो व्यक्ति होशियार और फरेब देने वाला माना जा सकता है, लेकिन यदि शुभ है तो खुद विधाता माना जाएगा।सावधानी : नेक और धर्मात्मा बने रहें। उधार न दें।(12).
बारहवाँ खाना : यहाँ यदि शनि है तो ऐसा व्यक्ति एकांत प्रिय, संन्यासी माना जाएगा।सावधानी : मकान जैसा बन रहा है वैसा बनने दें, उसमें अपनी अक्ल न लगाएँ और न ही बनने से रोकें।शनि ग्रह को जानें