आलेख | चौघड़िया | तंत्र-मंत्र-यंत्र | पत्रिका मिलान | रत्न विज्ञान | टैरो भविष्यवाणी | ज्योतिष सीखें | सितारों के सितारे | दैनिक राशिफल | नक्षत्र | जन्मकुंडली | आज का मुहूर्त | जन्मदिन | राशियाँ | नवग्रह | वास्तु-फेंगशुई | रामशलाका
मुख पृष्ठ धर्म-संसार » ज्योतिष » नवग्रह » कुंडली में राहु की दृष्टि एवं फल
नवग्रह
Feedback Print Bookmark and Share
 
ND

पिछले लेख में आपने देखा राहु अलग-अलग भाव में स्थित रहने पर जातक को क्या शुभ-अशुभ फल देता है। आगे आप देखें राहु की दृष्टि का शुभ-अशुभ फल। राहु अलग-अलग भाव में जब पूर्ण दृष्टि से देखता है तो जातक को क्या फल देता है जानिये -

प्रथम भाव में दृष्टि - राहु जब पूर्ण दृष्टि से प्रथम भाव को देखता है तो जातक को शारीरिक रोगी, वात विकारी, उग्र स्वभाव वाला एवं उद्योग से अलग करता है, इसी के साथ अधार्मिक प्रवृत्ति का एवं रिक्त चित्त वाला बनाता है।

द्वितीय भाव : राहु जब पूर्ण दृष्टि से द्वितीय भाव को देखता है तो जातक का धननाश, चंचल प्रवृत्ति के साथ परिवार से सुखहीन बना देता है।

तृतीय भाव : राहु पूर्ण दृष्टि से तीसरे भाव को देखता हो तो पराक्रमी बनाता है परंतु पुरुषार्थी एवं संतानहीन बनाता है।

चतुर्थ भाव : राहु पूर्ण दृष्टि से चौथे भाव को देखता हो तो उदर रोगी, मलिन बनाता है, इसी के साथ उदास एवं साधारण सुख देता है।

पंचम भाव : राहु पूर्ण दृष्टि से पाँचवें भाव को देखता हो तो भाग्यशाली, धनी एवं व्यवहार कुशल बनाता है। साथ ही संतान सुख देता है।

षष्ठम भाव : राहु पूर्ण दृष्टि से षष्ठम भाव को देखता हो तो पराक्रमी और बलवान बनाता है। शत्रुनाशक, व्यय करने वाला एवं नेत्र पीड़ा वाला होता है।

सप्तम भाव : राहु पूर्ण दृष्टि से सप्तम भाव को देखता हो तो धनवान बनाता है। इसी के साथ विषयी कामी और नीच संगति करने वाला होता है।
 
संबंधित जानकारी खोजें
यह भी खोजें: कुंडली, ज्योतिष, सुरेंद्र बिल्लौरे, नवग्रह, राहु, फल, शुभअशुभ