* कन्या लग्न में गुरु सप्तम, चतुर्थ, तृतीय भाव में होना चाहिए वहीं राशि स्वामी मंगल, वृश्चिक, धनु, मीन राशि का हो तो उत्तम सफलता दायक विद्वान बल द्वारा सफलता पाने वाला होगा। पत्नी या पति गुणी मिलेगा।
* तुला लग्न में गुरु सप्तम, दशम, तृतीय षष्ठ भाव में हो व राशि स्वामी मंगल सप्तम षष्ठ एकादश भाव में शुभ परिणाम देगा। वृश्चिक लग्न में गुरु लग्न पंचम, नवम, दशम, षष्ठ, द्वितीय भाव में शुभ फलदायी रहेगा। राशि स्वामी मंगल लग्न पंचम, दशम, द्वितीय भाव में शुभ फलदायी होगा।
* धनु लग्न में नक्षत्र स्वामी गुरु, लग्न पंचम नवम, चतुर्थ में हो राशि स्वामी मंगल लग्न, चतुर्थ, पंचम, नवम में युति या दृष्टि संबंध में हो तो अति शुभ परिणाम देने वाला होगा। राशि स्वामी लग्न चतुर्थ, द्वादश में हो व गुरु से दृष्ट हो तो मंगल दोष नहीं लगेगा।
* मकर लग्न में गुरु दितीय, चतुर्थ, सप्तम में शुभ रहेगा वहीं राशि स्वामी मंगल लग्न एकादश में शुभफलदायी रहेगा।
* कुंभ लग्न में नक्षत्र स्वामी गुरु एकादश, तृतीय, दशम, षष्ठ भाव में शुभ फलदायी रहेगा। मीन लग्न में गुरु लग्न नवम, पंचम, दशम में शुभ फलदायी रहेगा। राशि स्वामी मंगल लग्न दशम, नवम भाव में शुभ परिणाम देने वाला होगा।
विशाखा के तीन चरण, तुला राशि में जन्मा जातक खुशहाल विशाखा नक्षत्र आकाश मंडल में 16वाँ नक्षत्र है। इसके तीनों चरण तुला राशि में आते हैं। विशाखा नक्षत्र का स्वामी गुरु है। वहीं राशि स्वामी शुक्र है। नक्षत्र स्वामी की दशा 16 वर्ष की होती है, जबकि तुला राशि में चंद्रमा के अंशों कलाओं पर शेष योग्य दशा होती है। गुरु की दशा बीतने के बाद सबसे अधिक शुक्र से 1 वर्ष तक शनि की महादशा लगती है।
* तुला राशि व लग्न वालों के लिए शनि सुखेश व पंचमेश होता है। इस नक्षत्र में जन्मा जातक विवेकशील, गुणी, नीति कुशल, ईमानदार, विद्वान होता है। गुरु ज्ञान, विद्वता, पृथक्करण का कारक व महत्वाकांक्षी, उच्च पद प्राप्त करने वाला ग्रह हैं। वही राशि स्वामी शुक्र कला सौंदर्य, सेक्सी स्वभाव, धन आदि का कारक है। इस नक्षत्र में जन्मे जातकों पर गुरु शुक्र का जीवन भर प्रभाव रहता है। इनकी जन्म कुंडली में स्थितिनुसार इनका व्यक्तित्व होता है।
गुरु शुक्र साथ हो तो ऐसा जातक सुंदर, आकर्षक व्यक्तित्व का धनी, हरफन मौला होता है। मनोविनोदी स्वभाव का भी होता है। गुरु मेष लग्न में नवम भाव में हो व शुक्र तुला का हो तो ऐसे जातकों के जीवनसाथी का भाग्य उत्तम होता है। वहीं उनका दांपत्य जीवन सुखद रहता है। गुरु नक्षत्र स्वामी उच्च का चतुर्थ भाव में हो व शुक्र भी उच्च का हो तो ऐसी स्थिति वाला जातक ऐश्वर्य शाली, जनता के बीच प्रसिद्ध, वाहनादि से संपन्न मकान, भूमि-माता से लाभ मिलता है। |