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चित्रा नक्षत्र
प्रथम दो चरण में जन्मे व्यक्ति को स्वप्रयत्नों से लाभ
पं. अशोक पँवार 'मयंक'
Devendra SharmaND
आकाशीय मंडल में चौदहवाँ नक्षत्र है। इस नक्षत्र के प्रथम दो चरण कन्या राशि में आते हैं। पे पो नाम से इस नक्षत्र की पहचान होती है। नक्षत्र स्वामी मंगल राशि स्वामी बुध इन दो ग्रहों का जातक पर विशेष प्रभाव पड़ता है। इसके बाद लग्नानुसार उसका भी फल मिलता है।

मंगल साहस, ऊर्जा, महत्वाकांक्षा, उग्र स्वभाव का प्रतीक है। इसके साथ अन्य ग्रहों की युति दृष्टि भी अपना अपना प्रभाव दिखाती है। कभी-कभी मंगल की अशुभ स्थिति या शनि से दृष्टि हो तो अनिष्ट कारण भी बनती है। मंगल-गुरु के साथ हो व राशि स्वामी बुध देखे तो कुशल व्यापारी प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस या सेना में उच्च पद मिलता है।

ऐसे जातक उत्तम वक्ता के साथ अच्छे वकील भी बन सकते हैं। सी.ए. का भी कारक बन जाता है। मंगल-शुक्र की युति उस जातक को सुंदर तो बनाएगी, लेकिन सेक्सी भी बना देती है। मंगल सूर्य साथ हो तो ऐसे जातक अत्यंत तेजस्वी स्वभाव के साहसी, पराक्रमी, उच्च प्रशासन सेवाओं में जाकर सफलता हासिल करते हैं। राजनीति में सफल होते हैं।
  आकाशीय मंडल में चौदहवाँ नक्षत्र है। इस नक्षत्र के प्रथम दो चरण कन्या राशि में आते हैं। पे पो नाम से इस नक्षत्र की पहचान होती है। नक्षत्र स्वामी मंगल राशि स्वामी बुध इन दो ग्रहों का जातक पर विशेष प्रभाव पड़ता है। इसके बाद लग्नानुसार उसका भी फल मिलता है      


मंगल-चंद्र साथ हो तो थोड़ा शांत प्रवृत्ति का भी बना देता है। मंगल राहु साथ हो तो ऐसा जातक व्यसनी भी होता है। उच्च के राहु के साथ हो तो राजनीति में सफल होते हैं। मंगल शनि के साथ हो तो अनिष्टकारी होता है। जिस भाव में हो तो जिस भाव में संबंध हो या दृष्टि हो तो उस भाव के प्रभाव को नष्ट कर देता है। इसका अकसर प्रभाव 40 वर्ष के बाद दिखाई देता है।

मेष लग्न में मंगल की उत्तम स्थिति लग्न, पंचम, नवम भाव में शुभ मानी जा सकती है। लेकिन लग्न का मंगल पत्नी क्षेत्र में या पति क्षेत्र में अशुभ रहता है। यदि मंगल सप्तमेश के साथ हो तब भी दांपत्य जीनव बिगाड़ देती है।

वृषभ लग्न में नक्षत्र स्वामी मंगल की स्थिति चतुर्थ भाव में पंचम भाव में उत्तम रहेगी, वहीं यदि राशि स्वामी बुध के साथ हो तो जातक अपनी योग्यता का भरपूर लाभ पाने वाला होता है।

मिथुन लग्न में मंगल लग्न में चतुर्थ भाव में तृतीय भाव में शुभ परिणाम देने वाली होगी। बुध यदि मेष में हो या वृश्चिक राशि में हो व नक्षत्र स्वामी मंगल मिथुन राशि में या कन्या राशि में हो तो उत्तम राजयोगकारी होगा। ऐसे जातक व्यापार में जमीन के कार्य में सफल होते है। यदि शुक्र मंगल बुध साथ हो तो होटल व्यवसाय में भी सफलता पाते हैं।
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