मृगशिरा नक्षत्र के प्रथम 2 चरण वृषभ राशि में आते हैं। जहाँ नक्षत्र स्वामी मंगल है वहीं राशि स्वामी शुक्र इन दोनों ग्रहों के साथ यदि जन्म लग्न का स्वामी भू अनुकूल हो तो ऐसा जातक सफल, राजनीतिज्ञ माना जाता है। नक्षत्र स्वामी मंगल की दशा इस नक्षत्र पर 3 वर्ष 6 माह स्थितिनुसार जन्म के समय भोगना पड़ती है।
मंगल यदि अनुकूल स्थिति में हो तो कष्ट नहीं होता। यदि मंगल नीच राशि में होकर द्वितीय या सप्तम या अष्टम भाव में हो तो जन्म के समय मृत्युतुल्य कष्ट भोगना पड़ता है। इस नक्षत्र में पड़ने वाले नाम वे, वो है। मंगल के बाद राहू, फिर गुरु की महादशा चलती है। मंगल जहाँ कम समय के लिए हैं, वही राहू की महादशा बाल्यावस्था से लेकर युवा होने तक चल सकती है, अतः राहू की स्थिति को भी जान लेना होगा। राहू यदि जन्म पत्रिका में नीच का या अशुभ स्थिति में हो तो उस बालक का बचपन उद्दण्ड तरीके से व्यतीत होगा ही, इसके बाद उसमें बदलाव आकार सुधार आएगा, लेकिन पढ़ाई की उम्र निकल जाएगी और फिर वह बालक पढ़ने में ध्यान नहीं लगाएगा।
यदि राहू की स्थिति उत्तम हुई तो ऐसा बालक चतुर, ज्ञानी समझदार भी होगा। मंगल जन्म लग्न में मकर, धनु, मीन, सिंह, मेष, वृश्चिक का होकर नवम पंचम, लग्न दशम भाव में उत्तम फलदाता होगा। चतुर्थ भाव में भी उच्च का छोड़कर शुभ परिणाम देगा। नीच का मंगल तृतीय भाव में हो तो भाइयों का सुख नहीं देगा, लेकिन भाग्यशाली बनाएगा। शुक्र जो राशि स्वामी है वो वृषभ, तुला, मीन, मकर, कुंभ राशि का होकर शुभ स्थान में पड़ा हो तो शुभ परिणामों को बढ़ाने वाला होगा। | मृगशिरा नक्षत्र के प्रथम 2 चरण वृषभ राशि में आते हैं। जहाँ नक्षत्र स्वामी मंगल है वहीं राशि स्वामी शुक्र इन दोनों ग्रहों के साथ यदि जन्म लग्न का स्वामी भू अनुकूल हो तो ऐसा जातक सफल, राजनीतिज्ञ माना जाता है। |
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मेष लग्न में मंगल लग्न, दशम, नवम, पंचम, तृतीय भाव में शुभ परिणाम देगा। वृषभ में तृतीय भाव में सुख, चतुर्थ और नवम भाव में शुभ परिणाम देगा, मिथुन लग्न में एकादश, दशम, पंचम, षष्ट भाव में अनुकूल परिणाम मिलेंगे। कर्क लग्न में पंचम, नवम, सप्तम तृतीय भाव में शुभ परिणाम देगा। सिंह लग्न में नवम पंचम, लग्न चतुर्थ, तृतीय भाव में शुभ परिणाम देगा। कन्या लग्न में चतुर्थ भाव में कुछ शुभ परिणाम देगा।
तुला लग्न में अकाकर होगा, वृश्चिक लग्न में पंचम लग्न में हो तो शुभ परिणाम देगा। धनु लग्न में, पंचम भाव में नवम भाव में, चतुर्थ भाव में, तृतीय भाव में शुभ परिणाम देगा। मकर लग्न में स्थिति अनुसार स्वयं को परिणाम मिलेंगे। कुंभ लग्न में सप्तम, चतुर्थ दशम पंचम भाव में द्वादश भाव में परिणाम शुभ रहेंगे।
मीन लग्न में लग्न नवम, दशम, तृतीय भाव में शुभ परिणाम देगा। इसी प्रकार शुक्र की स्थिति अनुकूल रही तो परिणाम दोगुने होंगे। भारत के राष्ट्रपति रहे स्वर्गीय डॉ. राजेंद्रप्रसाद मृगशिरा नक्षत्र के प्रथम चरण में हुए थे। आपकी पत्रिका में धनु लग्न की होकर पंचमेश नक्षत्र स्वामी मंगल लग्न में दशमेश बुध के साथ था, वहीं शुक्र राशि स्वामी एकादश भाव में स्वराशि तुला का था।
लग्नेश गुरु की स्थिति भाग्य नवम भाव में थी वहीं राहू दशम भाव में मित्र राशि का था। आपको मंगल के बाद राहू गुरु का परिणाम अति शुभ परिणाम देने वाला साबित होकर भारत के राष्ट्रपति पद तक पहुँचे।
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