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ज्योतिष सीखें
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कर्क लग्न
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लग्न से सप्तम भाव, भावी जीवन साथी के बारे में बताता है। कर्क लग्न में शनि सप्तमेश होने के साथ अष्टम भाव का स्वामी भी होगा। अतः देखा जाए तो शनि की शुभ स्थिति ही सफल दाम्पत्य जीवन का आधार होगी। शनि जब स्वराशि का होकर सप्तम भाव में ही हो तो पंच- महापुरुष शश नाम का राजयोग होता है। इस योग से जातक का जीवन साथी साँवले रंग का होगा व व्यापारी या कोई महत्वपूर्ण पद पर भी हो सकता है।

सप्तमेश के साथ चतुर्थेश शुक्र हो तो उस जातक का पारिवारिक जीवन अत्यन्त सुखद कहा जाएगा। आर्थिक, पारिवारिक, वाहनादि से पूर्ण होगा या होगी। उसे भव्य भवन का भी लाभ मिलेगा, लग्नेश शनि के साथ हो तो वह अपने जीवन साथी के प्रति समर्पित रहता है। यदि मंगल साथ हो या दृष्टि संबंध हो तो उसका विवाह नहीं होता या संबंध जल्द टूट जाता है।

कभी-कभी जल्द वैधव्य योग भी बनता है। सप्तमेश एक घर पीछे हो तब भी दाम्पत्य जीवन में तनाव रह सकता है। सप्तम भाव के साथ षष्टेश व भाग्येश की युति हो तो कुछ बाधाओं के साथ भाग्य साथ देता है। लग्न पर उच्च दृष्टि होने से वह अपने प्रयत्नों से कार्य में सफल होता है। गुरु नीच का होने से उसके जीवन साथी की स्थिति ठीक नहीं रहती।

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शनि के साथ द्वितीयेश सूर्य हो तो संबंध विच्छेद की संभावना अधिक रहेगी। किसी कारण विवाह हो भी जाए तो जीवनभर कुछ न कुछ बीमारी लगी रहेगी। शनि राहु साथ हो तो उसके जीवन साथी का चरित्र संदिग्ध रहेगा। व्यसनी भी हो सकता है।

केतु साथ हो तो उसके जीवन साथी का ऑपरेशन भी हो सकता है या संबंध विच्छेद की नौबत आ सकती है। शनि की महादशा में मंगल का अन्तर चल रहा हो तो वह समय कठिन समय होगा। शनि में शुक्र का अन्तर सभी सुखों को देने वाला होगा। शनि में बुध का अन्तर भी ठीक व्यतीत होगा।
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