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मुख पृष्ठ धर्म-संसार » ज्योतिष » आलेख » गर्भस्थ बच्चों पर ग्रहों का प्रभाव
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जब बच्चा माँ के गर्भ में आता है तब से ग्रहों का अच्छा या बुरा प्रभाव उस पर पड़ता है। महाभारत में भी हमने पढ़ा है कि जब सुभद्रा के गर्भ में अर्जुन पुत्र अभिमन्यु था उस समय अर्जुन सुभद्रा को कहानी सुना रहे थे। उस कहानी में युद्ध कौशल पर चक्रव्यूह तोड़ना बता रहे थे। सुभद्रा चक्रव्यूह तोड़ने तक तो जागती रहीं लेकिन जैसे ही तोड़कर बाहर आना बता रहे थे ठीक उसी समय सुभद्रा को नींद ने घेर लिया। अर्जुन ने समझा कि सुभद्रा ने पूरी बात सुन ली लेकिन विधि को कुछ और ही मंजूर था इसलिए वे सो गई थीं।

जिन्होंने महाभारत पढ़ी या सुनी होगी उन्हें मालूम है कि अभिमन्यु ने महाभारत के युद्ध में चक्रव्यूह तो तोड़ा था लेकिन निकलना नहीं मालूम था। अतः उन्हें प्राण गँवाना पड़े थे। महाभारत में आई यह बात कोई किंवदन्ती नहीं है। यह बात सत्य है।

जब तीन माह का गर्भ हो जाता है, तब से बच्चे का निर्माण शुरू हो जाता है। बस यहीं से गर्भ पर ग्रहों का प्रभाव पड़ने लग जाता है।

ND
ऐसे समय ग्रहण पड़े तो गर्भवती महिला को ग्रहण काल में किसी भी प्रकार के औजारों का प्रयोग नहीं करना चाहिए यथा सब्जी काटना, कैंची से कोई भी वस्तु काटना या कपड़ा सिलना आदि से बचना चाहिए। जहाँ तक हो सके उत्तम साहित्य पढ़ना चाहिए, हिंसक फिल्म या नाटक या कहानी नहीं पढ़ना चाहिए। सभी को अपने-अपने धर्मानुसार धर्मग्रंथ पढ़ना चाहिए।

महापुरुषों के फोटो या सुन्दर बच्चों के चित्र सदैव सामने रखना चाहिए ताकि उन पर हमेशा नजर पड़ती रहे। महाभारत के चित्र भी नहीं लगाना चाहिए। घर में तीर-कमान, ढाल, तलवार भी नहीं लगाना चाहिए।

जब ग्रहों की स्थिति आकाश मण्डल में अच्छी हो, शुभ स्थिति में ग्रहों का होना बच्चे के जीवन पर अच्छा प्रभाव डालता है। कोई नीच के ग्रह न हो, न ही शनि-मंगल की युति हो और दृष्टि संबंध भी नहीं होना चाहिए।
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