श्रावण मास विशेष | महाकुम्भ | वर्ष के व्रत-त्योहार | हिन्दू धर्म | जैन धर्म | ईसाई धर्म | सिख धर्म | बौद्ध धर्म | इस्लाम धर्म | अन्य धर्म | आलेख | समाचार | धार्मिक स्थल | ध्यान व योग | संत-महापुरुष | प्रवचन | तंत्र-मंत्र | श्रीमद्‍भगवद्‍गीता | श्रीरामचरितमानस
मुख पृष्ठ » धर्म-संसार » धर्म-दर्शन » इस्लाम धर्म » इस्लाम धर्म में चांद का महत्व (, Grand Hazrat Imam Hussain Martyrdom)
इस्लाम में चांद का महत्व
ND

मुस्लिम समाज में सभी पर्व मनाने के पूर्व चांद को देखे जाने का रिवाज है। ईदुल फितर, रमजान, ईदुज्जुहा और मुहर्रम जैसे प्रमुख पर्वों पर चांद देखकर पर्व मनाया जाता है।

इसके पीछे हिजरी संवत्‌ कैलेंडर की अवधारणा है जो चंद्र गणना पर आधारित है और इसकी शुरुआत 622 ईस्वी से हुई।

Tajia
ND
इस दौरान हजरत मुहम्मद साहब ने मक्का से मदीना की ओर रुख किया था जिसे हिज्र कहते हैं। इस वजह से हिजरी कैलेंडर शब्द प्रचलन में आया। सूर्य गणना में एक साल में 365 दिन होते हैं जबकि चंद्र गणना में साल में 354 या 355 दिन होते हैं।

इस तरह सूर्य गणना की तुलना में चंद्र गणना हर साल 10 या 11 दिन पीछे होती है। हजरत मुहम्मद साहब ने हिदायत दी कि इस्लामी तीज-त्योहार चांद देखकर ही मनाए जाएं। इसलिए मुस्लिम बिरादरी समूचे विश्व में हिजरी कैलेंडर के मुताबिक पर्व मनाती है।

6 दिसंबर को हिन्दूवादी संगठन शौर्य दिवस मनाते हैं और मुस्लिम समुदाय शोक दिवस। इस बार 6 दिसंबर को मोहर्रम जैसा बड़ा पर्व भी है।
संबंधित जानकारी
WebduniaWebdunia