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फादर्स डे : आप एक पिता और मैं आपकी राजकुमारी

Author प्रीति सोनी|

 
 
आदरणीय पापा, 
चरण स्पर्श।
 
कैसे हैं? आशा करती हूं कि आप स्वस्थ और प्रसन्न होंगे। जीवन में काफी लगाव, प्रेम और आपके प्रति सम्मान रहा। संकोच की सीमाओं के बीच कभी शब्दों के जरिए जता या बता नहीं पाई, लेकिन आज जब सोच रही थी कि फादर्स-डे पर आपको उपहार क्या दूं? तो सोचा कि जिस पिता ने मुझे काबिल बनाने और हमेशा खुश रखने में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया, उनके लिए शायद किसी उपहार से ज्यादा संतान की उनके प्रति प्रेम और भावनाओं की अभिव्यक्ति अनमोल होगी।
 
इसीलिए मैं अपनी अमूल्य भावनाएं, जो सिर्फ आपके लिए हैं, उन्हें व्यक्त कर रही हूं। पापा, एक बेटी होने के नाते हमेशा से ही मेरा झुकाव आपकी तरफ अधि‍क रहा है और आज भी मां से ज्यादा आपसे ज्यादा पटरी बैठती है मेरी। जब भी मां बचपन में डांटती तो आप अपने पास बुलाकर दुलार दिया करते थे। मां ने किसी चीज के लिए मना किया, तो चोरी-चुपके आप ही फरमाइशें पूरी कर दिया करते थे। हर शौक मेरा आपने पूरा किया और हर छोटी-बड़ी उपलब्धि पर मेरा उत्साह बढ़ाते रहे। जब भी मेरी हिम्मत जरा भी कहीं कम पड़ती दिखाई दी, तो हौंसला आपने ही दिया।
 
ये कहकर कि 'तुम करो, आगे बढ़ो/ मैं हूं ना तुम्हारे साथ, फिर किस बात की चिंता?' आपके इन शब्दों ने जीवन की किसी भी कठिन और असमंजसभरी परिस्थिति में मेरा साथ नहीं छोड़ा और मैं संघर्ष के दिनों में भी दोगुने आत्मविश्वास के साथ खड़ी हुई और अपनी लड़ाई जारी रखी। आज भी समय कैसा भी हो, चाहे कोई साथ खड़ा हो या न हो, मुझे यह विश्वास है कि आप हर पल मेरे साथ खड़े हैं और दुनिया की कोई ताकत मुझे डिगा नहीं सकती। 
 
जब भी वे पुरानी बातें याद आती हैं, जब आप सुबह-सवेरे हमसे भी पहले उठकर खसखस और बादाम का हलवा बना दिया करते थे और जब मैं खाने में नखरे करती तो आप भले ही नाराज होकर डांटकर खि‍लाते थे। मेरे घर आते ही कहते-  बेटा बहुत अच्छी सब्जी बनी है, जल्दी आ जा, साथ में खाते हैं। खाना खाते वक्त जब मैं पहले पानी का ग्लास उठाकर पूरा पानी एक सांस में पी लिया करती, तब आपकी वे डांट - कि पानी में ही पूरा पेट भर जाएगा, तो खाओगी क्या? और फिर आपकी थाली में ही अंत में एक गर्मागर्म रोटी, घी शक्कर के साथ...वो मिठास, सारी मिठाईयों से अलग थी। आज भी घी शक्कर का कॉम्बिनेशन सिर्फ आपकी याद दिलाता है।

गर्मी के दिनों की वे रातें तो कभी भुलाई ही नहीं जा सकती, जब मुझे सुलाने के लिए आप हाथ से आधी रात तक पंखा करते रहते, जब तक मैं सो न जाऊं। ये सारी यादें अनगिनत और अनमोल ही नहीं, भावों के अतिरेक के साथ आत्मा से गहरे जुड़ी हुई हैं।
 
आपकी उस नाराजगी में छुपा प्यार तब समझ नहीं आता था, लेकिन अब आता है। जब मैं स्कूल जाने के लिए तैयार हो रही होती, तब तक आप मेरी साइकल को निकालकर, साफ करके उस पर मेरा स्कूल बैग भी रख दिया करते और मेरे जूतों पर कपड़ा मारकर पहनने के लिए तैयार करके रखते, जैसे कोई महारानी आकर बस बैठकर उन्हें पहनेगी और साइकल उठाकर निकल जाएगी।
 
आज भी जब मैं ऑफिस के लिए घर से निकलती हूं और पलटकर देखती हूं तो आपको गैलरी में खड़ा पाती हूं मुझे निहारते हुए। सच मैं राजकुमारी ही तो हूं आपकी। जैसे हर बेटी होती है अपने पिता के लिए। आप हमेशा से ही मेरे आदर्श रहे हो, जैसे हर पिता होता है बेटी के लिए ...उसका पहला हीरो।
 
जिसके साथ बचपन से ही सबसे बेहतर सामंजस्य रहा हो, जो शुरू से ही मेरे मन की हर बात को बगैर कुछ कहे ही समझ जाता हो, जो हर अच्छी और बुरी परिस्थिति में हमेशा मेरे साथ हो। जो दुनिया में सबसे ज्यादा मेरी फिक्र करता हो और जो पैसे न होने के बावजूद मेरी हर ख्वाहिश पूरी करने का दिल रखता हो...वही सुपर हीरो हो आप मेरे।
 
अब जब कभी मन की पलकों के पीछे से जीवनसाथी की कल्पना करती हूं तो उसके अस्ति‍त्व, व्यक्तित्व और कृतित्व में आपकी झलक देखती हूं। आप क्या हो मेरे लिए, इसका वर्णन करना असंभव है, लेकिन आप क्यों हो मेरे लिए? इसका जवाब केवल इस बात में छुपा है- 'आप एक पिता हो और मैं आपकी राजकुमारी।'कहने को बहुत कम हैं ये शब्द, लेकिन फिर भी... आप सबसे खास हो पापा। शुक्रिया, मेरे पिता होने के लिए...।  
                                                                     

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