बीएचयू लाठीचार्ज मामले की होगी न्यायिक जांच

पुनः संशोधित मंगलवार, 26 सितम्बर 2017 (17:41 IST)
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने (बीएचयू) में छात्र-छात्राओं पर हुए लाठीचार्ज और इससे जुड़ी घटनाओं की न्यायिक जांच कराने की मंगलवार को घोषणा की। इसमें कई लोग घायल हो गए
थे। सरकार ने इसकी जांच वाराणसी के मंडलायुक्त से भी कराई है। मंडलायुक्त ने अपनी रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं।



प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वाराणसी दौरे के अंतिम दिन 23 सितम्बर की देर रात छेड़खानी के विरोध में धरना दे रहे छात्र-छात्राओं पर लाठीचार्ज किया गया था। इसमें कई लोग घायल हो गए
थे। सरकार ने इसकी जांच वाराणसी के मंडलायुक्त से भी कराई है। मंडलायुक्त ने अपनी रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं।





राज्य सरकार के प्रवक्ता और ऊर्जामंत्री श्रीकांत शर्मा ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद बताया कि राज्य सरकार ने छात्र और छात्राओं के साथ संवाद स्थापित करने के निर्देश दिए
हैं, इसके साथ ही बीएचयू परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दिए
गए हैं।



उन्होंने कहा कि न्यायिक जांच में दोषी पाए
गए
लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने विपक्ष पर शिक्षण संस्थानों के परिसर को दूषित करने का आरोप लगाया और कहा कि जिन्हें जनता ने नकार दिया है वे ही अब इस तरह की खुराफात करवा रहे हैं। जांच में दूध का दूध, पानी का पानी हो जाएगा। छात्राओं के साथ छेड़खानी हर हाल में रुकनी चाहिए। परिसर में किसी को भी विषवमन का मौका नहीं दिया जाना चाहिए।

इससे पहले, विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो गिरीशचंद्र त्रिपाठी पूरे मामले की न्यायिक जांच की घोषणा कर चुके हैं। त्रिपाठी ने बताया कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति वीके दीक्षित की अगुवाई में एक न्यायिक जांच समिति गठित की जाएगी। यह समिति गत 23 सितम्बर की रात की घटना सहित पूरे मामले की जांच करेगी।



डॉ सिंह ने न्यायिक जांच शुरू करने एवं उसकी रिपोर्ट आने की कोई निश्चित तारीख या समय की जानकारी नहीं दी है। इसी मामले में जिलाधिकारी के आदेश पर छात्राओं एवं पत्रकारों पर 23 सितम्बर की रात लाठीचार्ज की घटना की मजिस्ट्रियल जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि मजिस्ट्रियल जांच अपर जिला मजिस्ट्रेट (प्रशासन) मुनीन्द्र नाथ उपाध्याय द्वारा की जा रही है।




उपाध्याय ने कहा कि लाठीचार्ज से सम्बन्धित कोई भी साक्ष्य किसी व्यक्ति के पास हो तो वह आगामी तीन अक्टूबर तक कलेक्ट्रेट स्थित उनके न्यायालय कक्ष में किसी भी कार्य दिवस में स्वयं उपस्थिति होकर मौखिक या लिखित रुप से प्रस्तुत कर सकता है। उधर, वाराणसी के मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण ने इस मामले की जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी है।



मुख्य सचिव राजीव कुमार ने घटना का संज्ञान लेते हुए वाराणसी के गोकर्ण एवं वाराणसी के अपर पुलिस महानिरीक्षक को जांच करने का आदेश घटना के दूसरे दिन ही दे दिया था। कुमार ने दोनों अधिकारियों को अपनी संयुक्त रिपोर्ट शासन को शीघ्र उपलब्ध कराए जाने का निर्देश दिया था।


गोकर्ण ने बीएचयू परिसर में शीघ्र पर्याप्त संख्या में सीसीटीवी कैमरे एवं सुरक्षाकर्मियों को तैनात करवाने का आश्वासन दिया है। हालांकि विश्वविद्यालय की अधिकांश छात्राएं अपने-अपने छात्रावासों को खाली कर चली गई हैं।

कई छात्राओं का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन के दबाव के कारण वह छात्रावास खाली करने को मजबूर हुईं, लेकिन कुलपति प्रो गिरीशचंद्र त्रिपाठी ने उनके आरोपों को खारिज कर दिया। उनका कहना है कि किसी भी छात्र या छात्रा को छात्रावास खाली करने के लिए
न तो दबाव डाला गया और न ही कोई आदेश दिया गया है।



इस बीच, विश्वविद्यालय परिसर का माहौल कल के मुकाबले अब कुछ सामान्य हुआ है, लेकिन बड़ी संख्या में पुलिसबल अभी भी तैनात हैं। मजिस्ट्रेट एवं नगर पुलिस अधीक्षक, क्षेत्राधिकारी सहित अन्य आला अधिकारी परिसर में मौजूद हैं तथा विशेष सुरक्षा निगरानी की जा रही है।



गौरतलब है कि विश्वविद्यालय परिसर की मुख्य द्वार 'सिंह द्वार' पर 22 सितंबर की सुबह अपनी सुरक्षा की मांग को लेकर सुबह छात्राएं धरने पर बैठी थीं। अगले दिन 23 सितंबर की रात कुलपति प्रो गिरीशचंद्र त्रिपाठी से बातचीत की कोशिशें विफल होने के बाद आंदोलनकारी उनके निवास की ओर मार्च कर रहे थे।

आरोप है कि इसी बीच विश्वविद्यालय के सुरक्षाकर्मियों ने छात्राओं पर लाठियां बरसाईं, जिसके बाद भड़की हिंसक घटनाओं में एक दर्जन छात्राएं एवं कई पत्रकारों एवं पुलिसकर्मियों सहित 18 से अधिक लोग घायल हो गए थे। उग्र भीड़ ने जमकर तोड़फोड़ की थी और एक ट्रैक्टर एवं कई मोटरसाइकलों को आग के हवाले कर दिया था। (वार्ता)

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