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रामभद्राचार्य के खेद जताने से संत पड़े ठंडे

लखनऊ| WD|
तुलसी की में संशोधन को लेकर अयोध्या के संतों द्वारा के तुलसी पीठाधीश्वर जगतगुरु स्वामी के प्रति नाराजगी अंततः शांत हो गई है।

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स्वामी रामभद्राचार्य ने संतों को आश्वस्त किया है कि तुलसी पीठ द्वारा सम्पादित प्रतियों को हम अपने पास ही रखेंगे, अन्य प्रतियों को मान्य न समक्षें। प्राचीन प्रतियाँ जो पूर्व में प्रचलित थीं उन्हें मान्य माना जाए। पत्र की भाषा पर संतोष जताते हुए अयोध्या समाज ने स्वामी रामभद्राचार्य के खिलाफ विरोध का निर्णय निरस्त कर दिया।

रामभद्राचार्य के प्रतिनिधि के रूप में उनकी शिष्या व हाईकोर्ट की अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री के माध्यम से अयोध्या के संतों की नाराजगी दूर हुई। रंजना शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती की ओर से अदालत में रामजन्मभूमि पुनरूद्धार की भी वकील हैं।

उन्होंने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं संत समाज को स्वामी रामभद्राचार्य के प्रतिनिधि की हैसियत से एक तरह का संतुष्टि पत्र दिया, जिसमें रामभद्राचार्य जी का कहना था कि वे विश्वास दिलाते हैं कि तुलसीपीठ द्वारा सम्पादित प्रतियों को वे अपने पास ही रखेंगे अन्य प्रतियों को मान्य न समक्षें। प्राचीन प्रतियाँ जो पूर्व में प्रचलित थीं उन्हें मान्य माना जाए।

पत्र में रामभद्राचार्यजी का कहना था कि अयोध्या के अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं संत समाज द्वारा ही मुझे वैष्णवाचार्य पद पर मेरी विद्वता को देखते हुए आसीन किया गया। (अरविन्शुक्ला)
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