कैसे हुई थी हुई प्रभु श्रीराम की मृत्यु

भगवान श्री अयोध्या में हुआ। उनके पिता का नाम दशरथ और माता का नाम कौशल्या था। को मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में जाना जाता है। उनकी जिंदगी काफी संघर्षों से भरी हुई थी। उन्होंने अपने समय के बड़े-बड़े दानवों का संहार किया और उस समय के सबसे बड़े दानव रावण का भी अंत कर दिया।
भगवान विष्णु के 7वें अवतार

हिन्दू धर्म में श्रीराम, श्रीविष्णु के 10 अवतारों में, सातवें अवतार हैं। राम का जीवनकाल एवं पराक्रम, महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित, संस्कृत भाषा में रचित महाकाव्य के रूप में लिखा गया है। जिसके रचियता थे 'महर्षि वाल्मीकि' और फिर गोस्वामी तुलसीदास ने रामकथा को अवधी में 'श्रीरामचरितमानस' नाम से रचा था।
राम, अयोध्या के राजा दशरथ और रानी कौशल्या के सबसे बडे पुत्र थे। राम की पत्नी का नाम सीता था (सीता जी, देवी लक्ष्मी का अवतार हैं) और इनके तीन भाई थे- लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न। भगवान शंकर के रुद्र अवतार हनुमानजी, भगवान राम के सबसे बड़े भक्त माने जाते हैं।

पवित्र नदी सरयु में समाधि

लेकिन यह रहस्य बहुत कम लोगों को मालूम है कि श्रीराम की मृत्यु कैसे हुई? दरअसल भगवान श्रीराम की मृत्यु एक रहस्य है जिसका उल्लेख सिर्फ पौराणिक धर्म ग्रंथों में ही मिलता है। पद्म पुराण के अनुसार भगवान श्रीराम ने सरयु नदी में स्वयं की इच्छा से समाधि ली थी। इस बारे में विभिन्न धर्मग्रंथों में विस्तार से वर्णन मिलता है। श्रीराम द्वारा सरयु में समाधि लेने से पहले माता सीता धरती माता में समा गईं थी और इसके बाद ही उन्होंने पवित्र नदी सरयु में समाधि ली।
यानी भगवान श्री राम ने ग्यारह हजार वर्षों तक शासन किया। इस बात का उल्लेख वाल्मीकि रामायण में मिलता है। महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित सभी अठारह पुराणों की गणना में 'पदम पुराण' को द्वितीय स्थान प्राप्त है। जिसमें श्लोक संख्या पचपन हजार हैं।


वेबदुनिया हिंदी मोबाइल ऐप अब iOS पर भी, डाउनलोड के लिए क्लिक करें। एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें। ख़बरें पढ़ने और राय देने के लिए हमारे फेसबुक पन्ने और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।

और भी पढ़ें :

दुर्घटनाएं अमावस्या और पूर्णिमा पर ही क्यों होती है? आइए ...

दुर्घटनाएं अमावस्या और पूर्णिमा पर ही क्यों होती है? आइए जानते हैं यह रहस्य-
पूर्णिमा के दिन मोहक दिखने वाला और अमावस्या पर रात में छुप जाने वाला चांद अनिष्टकारी होता ...

सूर्य-चन्द्र ग्रहण से कैसे जानें शकुन-अपशकुन, पढ़ें 9 काम ...

सूर्य-चन्द्र ग्रहण से कैसे जानें शकुन-अपशकुन, पढ़ें 9 काम की बातें...
अथर्ववेद में सूर्य ग्रहण तथा चन्द्र ग्रहण को अशुभ तथा दुर्निमित कहा गया है। यहां पाठकों ...

कुरुक्षेत्र के युद्ध में कौन किस योद्धा का वध करता है,

कुरुक्षेत्र के युद्ध में कौन किस योद्धा का वध करता है, जानिए
महाभारत का युद्ध 18 दिनों तक चला और लगभग 45 लाख सैनिक और योद्‍धाओं में हजारों सैनिक लापता ...

जया-पार्वती व्रत 25 जुलाई को, जानिए पूजन विधि और पौराणिक ...

जया-पार्वती व्रत 25 जुलाई को, जानिए पूजन विधि और पौराणिक व्रत कथा
जया-पार्वती व्रत अथवा विजया-पार्वती व्रत सौभाग्य सुंदरी व्रत की तरह है। इस व्रत से माता ...

प्राचीनकाल के नायक और नायिकाओं की जाति का रहस्य जानिए

प्राचीनकाल के नायक और नायिकाओं की जाति का रहस्य जानिए
अक्सर आपने प्राचीन मंदिरों के बाहर स्तंभों पर देवी, देवता, यक्ष और अप्सराओं की मूर्तियां ...

देवताओं की रात्रि प्रारंभ, क्यों नहीं होते शुभ कार्य कर्क ...

देवताओं की रात्रि प्रारंभ, क्यों नहीं होते शुभ कार्य कर्क संक्रांति में...
कर्क संक्रांति में नकारात्मक शक्तियां प्रभावी होती हैं और अच्छी और शुभ शक्तियां क्षीण हो ...

सूर्य कर्क संक्रांति आरंभ, क्या सच में सोने चले जाएंगे सारे ...

सूर्य कर्क संक्रांति आरंभ, क्या सच में सोने चले जाएंगे सारे देवता... पढ़ें पौराणिक महत्व और 11 खास बातें
सूर्यदेव ने कर्क राशि में प्रवेश कर लिया है। सूर्य के कर्क में प्रवेश करने के कारण ही इसे ...

यदि आप निरोग रहना चाहते हैं, तो पढ़ें यह चमत्कारिक मंत्र

यदि आप निरोग रहना चाहते हैं, तो पढ़ें यह चमत्कारिक मंत्र
भागदौड़ भरी जिंदगी में आजकल सभी परेशान है, कोई पैसे को लेकर तो कोई सेहत को लेकर। यदि आप ...

ज्योतिष सच या झूठ, जानिए रहस्य

ज्योतिष सच या झूठ, जानिए रहस्य
गीता में लिखा गया है कि ये संसार उल्टा पेड़ है। इसकी जड़ें ऊपर और शाखाएं नीचे हैं। यदि कुछ ...

व्रत कथा : देवशयनी एकादशी की पौराणिक एवं प्रा‍माणिक कहानी ...

व्रत कथा : देवशयनी एकादशी की पौराणिक एवं प्रा‍माणिक कहानी यहां पढ़ें...
धर्मराज युधिष्ठिर ने कहा- हे केशव! आषाढ़ शुक्ल एकादशी का क्या नाम है? इस व्रत के करने की ...

राशिफल