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रामनाथ कोविंद : प्रोफाइल

पुनः संशोधित सोमवार, 19 जून 2017 (14:53 IST)
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की ओर से घोषित राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद लंबे समय से भाजपा से जुड़े रहे हैं। वे दो बार राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं तथा वर्तमान में बिहार के राज्यपाल हैं। वे लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी जुड़े रहे हैं और उन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पसंद माना जा रहा है। 
 
रामनाथ कोविंद का जन्म उत्तरप्रदेश के कानपुर जिले की (वर्तमान में कानपुर देहात जिला) तहसील डेरापुर के एक छोटे से गांव परौंख में हुआ था। कोविंद का संबंध कोरी या कोली दलित जाति से है, जो उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति के अंतर्गत आती है। 
 
वकालत की उपाधि लेने के पश्चात वे दिल्ली उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में वकील के तौर पर सक्रिय रहे हैं। वह 1977 से 1979 तक दिल्ली हाई कोर्ट में केंद्र सरकार के वकील रहे। समाज सेवा में सक्रिय रहने वाले कोविंद भाजपा दलित मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और अखिल भारतीय कोली समाज के अध्यक्ष भी रहे हैं। वर्ष 1986 में दलित वर्ग के कानूनी सहायता ब्यूरो के महामंत्री भी रहे हैं।
 
8 अगस्त 2015 को बिहार के राज्यपाल के पद पर नियुक्ति हुई, लेकिन जब राज्यपाल पद पर उनकी नियुक्ति की गई थी तब भी यह कहा गया था कि भाजपा ने उनके सहयोगी दलों से समुचित विचार विमर्श नहीं किया था।
 
कोविंद का बिहार का राज्यपाल बनने के पीछे भी उनकी मोदी से निकटता को माना जाता रहा है। कोविंद भाजपा के दलित नेताओं में बड़ा नाम है, लेकिन उन्हें कभी भी हाईप्रोफाइल नेता नहीं माना गया। वर्ष 1994 और 2000 में कोविंद उत्तरप्रदेश से राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं। वे भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता भी रहे हैं। कोविंद के नाम की घोषणा को भाजपा की सोची समझी रणनीति माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि 2019 के चुनाव में भाजपा दलित कार्ड खेलना चाहती है। 
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