यह कैसा विकल्प है?
- श्रीमती आशा मोर
राघव के पास इतने सारे खिलौने और चॉकलेट देखकर मनु चॉकलेट खाने की लालसा से राघव के पास आया और बात करने लगा।'
राघव, ये कौन थे, जो तुम्हें इतने सारे खिलौने और चॉकलेट देकर गए।''
मेरे पापा थे।''
ये तुम्हारे पापा थे, तो फिर तुम यहां अनाथाश्रम में क्यों रहते हो।' मनु ने आश्चर्य से पूछा।'
मुझे पता नहीं', राघव ने झल्लाते हुए कहा।'
तुम्हारे पापा तो कार से आए थे।''
हां तो', राघव को गुस्सा आ रहा था।'
तुम लकी हो, मेरे तो मम्मी-पापा दोनों ही नहीं हैं, तुम्हें पता मेरे मम्मी-पापा दोनों कार एक्सीडेंट में मर गए।' मनु ने भोलेपन से कहा। आठ वर्ष का राघव, जो कि परिस्थितियोंवश कुछ ज्यादा ही परिपक्व हो गया था, चुपचाप मनु के भोले चेहरे की ओर देख रहा था, जो कि भावविहीन था, उसकी ललचाई नजरें तो बस चॉकलेट के डिब्बे पर अटकी हुई थीं।एक साल में कभी कोई उससे मिलने नहीं आया था, न ही कोई उसके लिए खिलौने और चॉकलेट लेकर आया था। धीरे-धीरे मनु के दिमाग से मां-बाप की यादें धुंधली होने लगी थीं। इस समय राघव के हाथ में चॉकलेट का डिब्बा देखकर मनु को अपनी मां की याद आ गई, तो उसने राघव से पूछा- '
और तुम्हारी मम्मी...?', पर उसकी नजर अभी भी राघव के हाथ में चॉकलेट के डिब्बे पर थी।'
मम्मी ने दूसरी शादी कर ली', राघव ने गर्दन झुकाकर, खिलौनों को एक तरफ ठेलते हुए कहा।'
अब पापा भी दूसरी शादी कर रहे हैं', राघव चॉकलेट का डिब्बा मनु को थमाकर बुझे हुए कदमों से धीरे-धीरे दूसरे कमरे में चला गया।
सौजन्य से - गर्भनाल