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अट्‍ठाराह साल की उम्र असह्य होती है
सिर उठाने का खतरा मोल लेने की गुस्ताख‍ी करती है
अट्‍ठाराह साल की उम्र में ही रोज-रोज
विराट दुस्साहस झांकते रहते हैं

यह उम्र रक्तदान का पुण्य जानती है
स्टीमर की तरह भाप के वेग से चलती है
प्राण देने-लेने की झोली खाली नहीं रहती
आत्मा को शपथ का कोलाहल सौंपा कर‍ती है

अट्‍ठाराह साल की उम्र भयंकर होती है
ताजे प्राणों में असह्य यंत्रणा हुआ करती है
इस उम्र में प्राण तीव्र और प्रखर रहते हैं
इस उम्र में कानों में कितनी ही मंत्रणाएं आती हैं

अट्‍ठाराह साल की उम्र उपद्रवी होती है
रास्तों और बिहाड़ों में तूफान उठाया करती है
विपत्ति में पतवार थामे रहना कठिन हो जाता है
हजारों प्राण क्षत-विक्षत हुआ करते हैं

फिर भी अट्‍ठाराह की जय-ध्वनि सुनी है मैंने
यह उम्र विपत्ति और तूफान में जीवित रहती है
विपत्ति के सामने यह उम्र अग्रणी रहती है
यह उम्र तब भी नया कुछ तो करती है

जान लो यह उम्र भीरू, कापुरुष नहीं होती
राह चलते यह उम्र नहीं रुकती
इस उम्र में किसी तरह का संदेह नहीं रहा करता
इस देश के कलेजे में अट्‍ठाराह समा जाए।

अनुवादक - गंगानंद झा (मूल बांग्ला से हिंदी अनुवाद)
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