प्रवासी साहित्य : बरसाती रात शहर की...


 
 
 
 
वह बरसाती रात शहर की, वह चौड़ी सड़कें गीली,
बिजली की रोशनी बिखरती थी जिन पर सोनापीली।
 
दूर सुनाई देती थी वह सरपट टापों की पट-पट,
कभी रात के सूनेपन में नन्ही बूंदों की आहट।
 
आती-जाती रेलगाड़ियां भी तो एक गीत गातीं,
कहीं किसी की आशा जाती, कहीं किसी की निधि आती।
 
पार्क सिनेमा सभी कहीं ये बूंदें बरस रही होंगी,
किसे ज्ञात मेरी आंखें अब किसको खोज रही होंगी।
 
घर न कर सका कभी किसी के मन में मैं जो अभिशापित, 
सोच रहा हूं अपने घर से भी अब मैं क्यों निर्वासित।
 
यही महीना गए साल जब बरसा था जमकर पानी,
रातोरात द्वार पर कामिनी फूल उठी थी मनमानी।
 
तीव्र गंध थी भरी हृदय में, सहज खुल गई थीं आंखें,
आज यहां मन मारे बैठा मन-पंछी भीगी पांखें।
 
छोड़ समंदर की लहरों की नीलम की शीतल शय्या,
आती थी वह बंगाले से जंगल-जंगल पुरवय्या।
 
झीनी बूंदों बीनी धानी साड़ी पहने थी बरसात,
गरज-तरजकर चलती थी, वह मेघों की मदमत्त बरात।
 
झर लगता था और वहीं पर बूंदें नाचा करती थीं,
बाजे-से बजते पतनाले, सड़क लबालब भरती थीं।
 
कुरता चिपका जाता तन पर, धोती करती मनमानी,
छप-छप करते थे जूते जब, बहता था सिर से पानी।
 
भरी भरन उतरी सिर पर से, कहां साइकिल चलती थी,
घर के द्वारे कीच-कांद थी, चप्पल चपल फिसलती थी।
 
प्यारी थी वह हुम्मस धमस भी, खूब पसीने बहते थे,
अब आई पुरवय्या, आया पानी कहते रहते थे।
 
बरसे राम बवे दुनिया, यों चिल्ला उठते थे लड़के,
रेला आया, बादल गरजे, कड़क-कड़क बिजली तड़पे।
 
कितनी प्यारी थीं बरसातें, हरे-हरे दिन, नीली रातें,
रंग-रंगीली सांझ सुहानी, धुली-धुलाई सुन्दर प्रातें।
 
आई है बरसात यहां भी, आज ऊझना, कल झर था,
होते यों दिन-रात यहां, पर अंतर धरती-अंबर का।
 
यहां नहीं अमराई प्यारी, यहां नहीं काली जामुन,
है सूखी बरसात यहां की मोर उदासा गर्जन सुन।
 
इन तारों के पार कहीं उड़ जाने को कहतीं आंखें,
पर मन मारे बैठा मेरा मन-पंछी, भीगी पांखें।
 
-नरेन्द्र शर्मा
 
-1943
 

Widgets Magazine
वेबदुनिया हिंदी मोबाइल ऐप अब iOS पर भी, डाउनलोड के लिए क्लिक करें। एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें। ख़बरें पढ़ने और राय देने के लिए हमारे फेसबुक पन्ने और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।



और भी पढ़ें :

ग़ज़ल : दर पे खड़ा मुलाकात को...

ग़ज़ल : दर पे खड़ा मुलाकात को...
दर पे खड़ा मुलाकात को तुम आती भी नहीं, शायद मेरी आवाज़ तुम तक जाती भी नहीं।

घर को कैंडल्स से ऐसे सजाएं

घर को कैंडल्स से ऐसे सजाएं
जब भी घर, कमरा या टेबल सजाने की बात आती है तब कैंडल्स का जिक्र न हो, ऐसा शायद ही हो सकता ...

अपना आंगन यूं सजाएं फूलों की रंगोली से...

अपना आंगन यूं सजाएं फूलों की रंगोली से...
रंगोली केवल व्रत-त्योहार पर ही नहीं बनाई जाती, बल्कि इसे घर के बाहर व अंदर हमेशा ही बनाया ...

भोजन के बाद भूलकर भी ना करें यह 5 काम, वर्ना सेहत होगी ...

भोजन के बाद भूलकर भी ना करें यह 5 काम, वर्ना सेहत होगी बर्बाद
आइए जानें कि 5 कौन से ऐसे काम हैं जो भोजन के तुरंत बाद नहीं करना चाहिए ....

बाल गीत : बनकर फूल हमें खिलना है...

बाल गीत : बनकर फूल हमें खिलना है...
आसमान में उड़े बहुत हैं, सागर तल से जुड़े बहुत हैं। किंतु समय अब फिर आया है, हमको धरती चलना ...

जरा चेक करें कहीं आपकी कोहनी भी तो कालापन लिए हुए नहीं?

जरा चेक करें कहीं आपकी कोहनी भी तो कालापन लिए हुए नहीं?
भले ही आप चेहरे से कितनी ही खूबसूरत क्यों न हों, देखने वालों की नजर कुछ ही मिनटों में ...

क्या है राशि, किस राशि से कैसे जानें भविष्य, पढ़ें सबसे खास ...

क्या है राशि, किस राशि से कैसे जानें भविष्य, पढ़ें सबसे खास जानकारी
आकाश में न तो कोई बिच्छू है और न कोई शेर, पहचानने की सुविधा के लिए तारा समूहों की आकृति ...

पारंपरिक टेस्टी-टेस्टी आम का मीठा अचार कैसे बनाएं, पढ़ें ...

पारंपरिक टेस्टी-टेस्टी आम का मीठा अचार कैसे बनाएं, पढ़ें आसान विधि
सबसे पहले सभी कैरी को छीलकर उसकी गुठली निकाल लीजिए। अब उसके बड़े-बड़े टुकड़े कर लीजिए।

9 ग्रहों की ऐसी पौराणिक पहचान तो कहीं नहीं पढ़ी...

9 ग्रहों की ऐसी पौराणिक पहचान तो कहीं नहीं पढ़ी...
भारतीय ज्योतिष और पौराणिक कथाओं में 9 ग्रह गिने जाते हैं, सूर्य, चन्द्रमा, बुध, शुक्र, ...

क्या सच में ग्रहों की चाल प्रभावित करती है हमारे जीवन को, ...

क्या सच में ग्रहों की चाल प्रभावित करती है हमारे जीवन को, जानिए कैसे
सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड 360 अंशों में विभाजित है। इसमें 12 राशियों में से प्रत्येक राशि के 30 ...