क्रिसमस की छुट्टियों की वजह से सुस्त कारोबार के अलावा वर्ष के अंत को देखते हुए विदेशी संस्थागत निवेशकों की बाजार से धन निकासी के कारण 27 दिसंबर को समाप्त हुए सप्ताह में देश भर के शेयर बाजारों में गिरावट का रूख रहा और सेंसेक्स गिरावट प्रदर्शित करते बंद हुए।
बंबई शेयर बाजार में समीक्षा सप्ताह के दौरान बंबई सेंसेक्स 10,000 अंक के महत्वपूर्ण स्तर को लांघने के बाद विदेशी संस्थागत निवेशकों की धन निकासी से हानि के चपेट में आ गया और सप्ताहंत में 7.63 प्रतिशत की गिरावट प्रदर्शित करता बंद हुआ।
यहाँ क्रिसमस की छुट्टियों के कारण सुस्त कारोबार के अलावा अग्रिम कर भुगतान में भारी गिरावटऔर तीसरी तिमाही में निगमित कंपनियों के खराब कार्य प्रदर्शन की आशंका ने कमजोर होती मुद्रास्फीति दर को लगभग नजरअंदाज कर दिया। उक्त नकारात्मक खबरों ने मुद्रास्फीति दर में गिरावट की वजह से ब्याज दरों में कटौती किए जाने की संभावना की अनदेखी कर दी।
बंबई शेयर बाजार का 30 शेयरों पर आधारित सेंसेक्स सप्ताहांत में 770.99 अंक अथवा 7.16 प्रतिशत की गिरावट के साथ 9328.92 अंक पर बंद हुआ। निफ्टी भी 220.25 अंकों की गिरावट के साथ सप्ताहांत में 2857.25 अंक पर बंद हुआ।
बाजार के दबाव में रहने का मुख्य कारण विदेशी निधियों की धन निकासी थी जिन्होंने शेयर बाजार से करीब 959 करोड़ रूपये की निकासी की। इसके अलावा अग्रिम कर संग्रह में 22 प्रतिशत की कमी को देखते हुए यह आशंका भी काम कर रही थी कि निगमित कंपनियों का घोषित किया जाने वाला तीसरी तिमाही का परिणाम वैसा नहीं होगा जैसा कि पहले अपेक्षा की जा रही थी।
भारत के चौथे सबसे बड़े साफ्टवेयर निर्यातक सत्यम को लेकर चल रहा विवाद का भी बाजार पर प्रतिकूल असर हुआ। उल्लेखनीय है कि सत्यम को विश्व बैंक ने अपने साथ कामकाज करने के लिए आठ वर्षो के लिए प्रतिबंधित कर दिया है।
इस बीच मुद्रास्फीति दर में गिरावट ने इस उम्मीद को पैदा कर दिया है कि भारतीय रिजर्व बैंक निकट भविष्य में प्रमुख ब्याज दरों में कटौती कर सकता है। मुद्रास्फीति दर इस वर्ष के उच्चतम स्तर 12.91 प्रतिशत के मुकाबले समीक्षाधीन सप्ताह में घटकर नौ माह के निम्नतम स्तर 6.61 प्रतिशत तक नीचे चला गया।
सरकार के ताजा वित्तीय और राजकोषीय उपायों की घोषणा के बाद बाजार निवेशक बाजार में सुधार आने की उम्मीद में हैं। |