देश के शेयर बाजारों का रुख आगामी सप्ताह विदेशी शेयर बाजार की चाल पर निर्भर करेगा। उधर सात नवम्बर को समाप्त हुए सप्ताह में उठापटक के बाद छह सप्ताह से चली आ रही गिरावट का सिलसिला थम जाने से सेंसेक्स 176 तथा निफ्टी 87 अंकों की बढ़त पाने में सफल रहे।
रिजर्व बैंक के रैपो दर, सीआरआर और एसएलआर में कटौती के फैसले से बीते सप्ताह के पहले दो कारोबारी दिवसों में शेयर बाजारों ने अच्छी छलाँग लगाई, किंतु इसके बाद दो दिन मुनाफावसूली चलने से यह तेजी लगभग गायब हो गई। शुक्रवार को फिर से बाजार में सुधार दिखाई दिया।
दिल्ली शेयर बाजार के पूर्व अध्यक्ष और ग्लोब कैपीटल मार्केट्स लिमिटेड के प्रमुख अशोक कुमार अग्रवाल का मानना है कि निवेशकों में घबराहट कम हुई है। बाजार के सीमित दायरे में रहने की अधिक उम्मीद है। उनका कहना है कि बाजार के नीचे आने पर निवेशकों को निवेश करने के मौके का फायदा उठाना चाहिए, किंतु निवेश करने से पहले पूरे सोच विचार के बाद ही कदम उठाने की जरूरत है।
अग्रवाल मानते हैं कि फिलहाल निवेशकों को ब्लू चिप कंपनियों की स्थिति की जानकारी लेकर निवेश करना चाहिए, जो लंबी अवधि में फायदेमंद साबित हो सकता है। उनकी राय में अचल संपत्ति और इस्पात क्षेत्र की कंपनियों में अधिक जोखिम है, जबकि फार्मास्युटिकल्स और एफएमसीजी के शेयरों में भविष्य में अच्छी संभावनाएँ हैं।
बीते सप्ताह सटोरिया और साझा कोषों के समर्थन से सेंसेक्स कुल 176.23 अंकों के फायदे से 9944.29 अंक पर बंद हुआ। निफ्टी 87.30 अंक अर्थात 3.02 प्रतिशत के लाभ से 2973 अंक पर पहुँच गया।
बीएसई के मिडकैप और स्मालकैप में क्रमश: 4.85 तथा 3.58 प्रतिशत का फायदा हुआ। यह 155.35 अंक तथा 134.99 अंक की बढ़त से क्रमश: 3355.38 तथा 3900.10 अंक पर बंद हुए।
वैश्विक वित्त संकट और मंदी से ऊबरने के लिए विश्व भर के बड़े केन्द्रीय बैंकों ने ब्याज दरों में कटौती की। यूरोप के सेन्ट्रल बैंक ने ब्याज दर आधा प्रतिशत घटाकर सवा तीन प्रतिशत कर दी। बैंक ऑफ इंग्लैंड ने इसे डेढ़ प्रतिशत कम किया।
स्विटजरलैंड, दक्षिण कोरिया, डेनमार्क और चैक गणराज्य के केन्द्रीय बैंकों ने भी ब्याज दरों में कमी की। अमेरिका का फैडरल रिजर्व अक्टूबर माह के आखिर में ही ब्याज दरों में आधा प्रतिशत की कमी कर चुका है।
प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह ने एक बैठक में देश के शीर्ष उद्योगपतियों को बैठक में भरोसा दिलाया कि सरकार वैश्विक वित्त संकट के प्रभाव को बेअसर करने के लिए हर संभव कदम उठाने के लिए तैयार है।
वित्तमंत्री पी. चिदम्बरम के साथ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने ब्याज दर और जमा दर में कटौती किए जाने पर सहमति जताई और इस फैसले पर अमल भी शुरू कर दिया है।
इस वर्ष सेंसेक्स 10322.70 अंक टूट चुका है। दस जनवरी 2008 के सेंसेक्स के रिकॉर्ड स्तर से तुलना की जाए तो इसमें 11242.48 अंक का नुकसान हुआ है। विदेशी संस्थागत इस वर्ष पाँच नवंबर तक के आँकड़ों के अनुसार 49 हजार 947 करोड़ 60 लाख रुपए के बिकवाल रहे हैं।
वित्त मंत्री की वैश्विक मंदी की चिंता में बीते सप्ताह धातु कंपनियों के शेयर पिघल गए। स्टरलाईट इंडस्ट्रीज के शेयर में 12.77 प्रतिशत तथा टाटा स्टील में 9.52 प्रतिशत की भारी गिरावट आई। बुनियादी सुविधा क्षेत्र की रिलायंस इन्फ्रा. का शेयर 22.80 प्रतिशत बढ़ गया।
टाटा मोटर्स के शेयर में 7.51 प्रतिशत का नुकसान हुआ। मारुति सुजूकी का शेयर 5.88 प्रतिशत बढ़ गया। महिन्द्रा ऐंड महिन्द्रा के शेयर में मामूली गिरावट देखी गई।
जापान की कंपनी के साथ अधिग्रहण समझौता पूरा हो जाने की खबरों के बीच रैनबैक्सी लैब के शेयर ने 28.89 प्रतिशत की छलाँग लगाई। |