मुख पृष्ठ > खबर-संसार > शेयर बाजार > साप्ताहिक समीक्षा > मंदी की आँधी में औंधे मुँह गिरा बाजार
सुझाव/प्रतिक्रियामित्र को भेजियेयह पेज प्रिंट करें
 
मंदी की आँधी में औंधे मुँह गिरा बाजार
वैश्विक मंदी की अफवाहों के कारण दुनियाभर में घबराहटपूर्ण बिकवाली से देशभर के प्रमुख शेयर बाजार भी बिकवाली की चपेट में आ गए और सेंसेक्स औंधे मुँह लुढ़कते नजर आया।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में कारोबारी गतिविधियों का रूख वैश्विक संकेतों पर निर्भर करेगा।

प्रतिकूल वैश्विक स्थितियों के अलावा अगस्त 2008 में भारत के औद्योगिक विकास दर भारी गिरावट के साथ 1.3 प्रतिशत के स्तर पर रह गई। इस स्थिति ने भी स्थिति को और नाजुक कर दिया।

बाजार में भाग लेने वाले कारोबारियों के अनुसार आगामी दिनों में बाजार का रूख वैश्विक संकेतों से तय होगा। उन्होंने किसी भारी तेजी की संभावना से इंकार किया, लेकिन कहा कि बाजार में धन निकासी बढ़ेगी।

भारतीय रिजर्व बैंक ने भी हरकत में आते हुए छह अक्तूबर को नकद आरक्षित अनुपात में 0.5 प्रतिशत की कटौती की तथा शुक्रवार की सुबह और एक प्रतिशत की कटौती की, जिससे बैंकिंग तंत्र में 60,000 करोड़ रुपए आएँगे।

कई प्रमुख देशों के केन्द्रीय बैंकों ने भी नकदी तरलता को समर्थन देने के लिए अपनी ब्याज दरों में कटौती की।

बंबई शेयर बाजार में समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान शेयरों के भाव बेतहाशा लुढ़कते नजर आए और सेंसेक्स के लिए यह दो दशक का सबसे खराब सप्ताह साबित हुआ। वैश्विक मंदी की अफवाहों के कारण दुनियाभर में घबराहटपूर्ण बिकवाली शुरू होने से भारतीय शेयर बाजारों में 10 से 26 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई।

बंबई शेयर बाजार का 30 शेयरों पर आधारित सेंसेक्स 11 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में 1998.47 अंक अथवा 15.95 प्रतिशत की अब तक की सबसे अधिक साप्ताहिक गिरावट प्रदर्शित करता सप्ताहांत में 10239.78 पर बंद हुआ।

इसी प्रकार 50 शेयरों के व्यापक आधार वाले नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी अंकों के लिहाज से 538.35 अंक की अब तक की सबसे बड़ी गिरावट प्रदर्शित करता सप्ताहांत में 3279.95 अंक पर बंद हुआ।

प्रमुख देशों के केन्द्रीय बैंकों द्वारा नकदी को बढ़ाने के लिए समन्वित प्रयासों का बाजार की धारणा पर असर नहीं पड़ा और निवेशक बेबस नजर आए और उन्होंने अपने जमा सौदों को बेचना शुरू कर दिया। विश्व बाजार में यह आशंका घर करती जा रही थी कि बढ़ता ऋण संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था को मंदी की ओर घसीटेगा।

बाजार में इतनी भयानक अफरा-तफरी थी कि सेंसेक्स आधारित शेयरों में से केवल रैनबैक्सी ही सकारात्मक रूख लिए बंद होने में सफल हुआ, जबकि शेष 29 शेयर भारी घाटा दर्शाते बंद हुए।

घाटे में रहने वाले शेयरों में जयप्रकाश एसो. 34.41 प्रतिशत की गिरावट के साथ शीर्ष पर रहा। उसके बाद स्टरलाइट इंडस्ट्रीज में 30.70 प्रतिशत, आरईएल इंफ्रा में 30.48 प्रतिशत, रिलायंस कॉम, में 28.75 प्रतिशत, आईसीआईसीआई बैंक में 27.83 प्रतिशत, टाटा स्टील में 26.99 प्रतिशत, लार्सन एंड टुब्रो में 23.25 प्रतिशत, विप्रो में 22.74 प्रतिशत, टीसीएस में 20.37 प्रतिशत, सत्यम कम्प्यूटर में 20.34 प्रतिशत, एचडीएफसी बैंक में 17.82 प्रतिशत, हिन्डाल्को में 17.45 प्रतिशत और एचडीएफसी में 17.41 प्रतिशत की गिरावट आई।

कलकत्ता शेयर बाजार में समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान सिर्फ एक ही दिन कारोबार हुआ लेकिन इसके बावजूद यह आम वैश्विक रूख से अछूता नहीं रह पाया और यह मंदी का रूख लिए बंद हुआ।

चालीस शेयरों पर आधारित कलकत्ता शेयर बाजार का सूचकांक सप्ताह के आरंभ में 5764.57 अंक पर खुला और सप्ताहांत में 743.45 अंकों की गिरावट प्रदर्शित करता 5 021.12 पर बंद हुआ। पिछले सप्ताहांत कलकत्ता सूचकांक में 703.31 अंकों की गिरावट आई थी।
संबंधित जानकारी खोजें
और भी
अमेरिका से प्रभावित रहे भारतीय शेयर बाजार
बाजार के मंदड़ियों को ठिकाने लगाने की कसरत
मिला-जुला रहा बाजार का रुख
शेयर बाजार से मंदी का विसर्जन नहीं
अनिश्चितता के साए में रहेगा शेयर बाजार
शेयर बाजार ढुलमुल स्थिति में