अमेरिकी वित्तीय संकट गहराने से भारतीय शेयर बाजारों में बीते सप्ताह भारी बिकवाली रहने से बीएसई का सेंसेक्स 940.14 अंक की डुबकी लगा गया और एनएसई का निफ्टी चार हजार के आँकड़े से नीचे दो वर्ष के न्यूनतम स्तर तक लुढ़क गया।
लेहमैन बद्रर्स के डूबने के बाद बीते सप्ताह अमेरिका के सबसे बड़े बैंक वॉशिंगटन म्युचुअल फंड को भी बंद कर दिया गया जबकि कांग्रेस में वित्तीय संकट से निकलने के 700 अरब डॉलर के राहत पैकेज पर बहस जारी है। अमेरिका में तरलता का संकट बनने से विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारी बिकवाली की, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ढलान पर रहे।
एनएसई में निफ्टी सप्ताहांत तक 260 अंक खोकर 3985.25 अंक पर आ गया। इसी अवधि में बीएसई का कारोबार 13102.18 अंक पर बंद हुआ। सप्ताह की शुरू में बीएसई में सेंसेक्स ने 14215.33 अंक की ऊँचाई को छुआ था जबकि पिछले कारोबारी दिवस में यह 14042.32 अंक पर बंद हुआ था। इसी दिन एनएसई में निफ्टी में 4248.95 अंक पर पहुँचा था। इसके बाद बुधवार को छोड़कर दोनों सूचकांक घाटे में रहे। कारोबारियों का कहना है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के कमजोर होने, अमेरिका में वित्तीय संकट से निकलने के प्रयासों पर संदेह छाने और विदेशों संस्थागत निवेशकों के बिकवाली करने से शेयर बाजारों को तीखा झटका लगा है।
बीते सप्ताह में मिड कैप सूचकांक 287.96 अंक गिरकर 4940.82 अंक पर रहा। स्माल कैप सूचकांक भी 354.21 अंक फिसलकर 5861.78 अंक पर आ गया।
इस वर्ष में सेंसेक्स में 7184.84 अंक गिर चुका है। यह 31 दिसंबर 2007 को 20286.99 अंक पर बंद हुआ था। सेंसेक्स 10 जनवरी 2008 की अपनी सर्वाधिक ऊँचाई 21206.77 अंक से 8104.59 अंक गिर चुका है।
जानकारों का कहना है कि अगले सप्ताह भी शेयर बाजारों में कामकाज ढीला रहने की संभावना है। अमेरिका के राहत पैकेज से निवेशकों को ज्यादा उम्मीदें नहीं है।
देश में बीते सप्ताह के दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 8061 करोड़ रुपए की बिकवाली की। इससे कई शेयरों को तगड़ा नुकसान हुआ। बीएसई में रैनबेक्सी लेबो और हिल्डालको इंड अपने 52 सप्ताह के न्यूनतम स्तर पर पहुँच गए। रिलायंस इंड 4.43 प्रतिशत और स्टरलाइट इंड 4.36 प्रतिशत लुढ़क गए। रैनबेक्सी 23.67 प्रतिशत घट गए।
अमेरिका में वित्तीय संकट गहराने से स्थानीय बैंकों को तगड़ा झटका लगा। आईसीआईसीआई बैंक 10.45 प्रतिशत, एचडीएफसी बैंक 4.12 प्रतिशत और एसबीआई 8.33 प्रतिशत कम हो गया। रियलटी के डीएलएफ को 13.45 प्रतिशत और यूनीटेक को 30.59 प्रतिशत की गिरावट सहनी पड़ी।
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