इसलिए केपिटल गुड्स एवं रियल एस्टेट शेयरों में जोर-शोर से खरीदी चलती थी, किंतु अब ग्रोथ स्टोरी थोड़ी कमजोर पड़ने लगी है इसलिए जानकार निवेशक आकर्षक वेल्यूएशन के आधार पर खरीदी कर रहे हैं। फार्मा सेक्टर में वॉकहार्ड एवं एफएमसीजी सेक्टर में आईटीसी जैसी कई कंपनियाँ मौजूद हैं। इन कंपनियों की प्रगति रफ्तार भी अच्छी है तथा शेयर भाव भी आकर्षक हैं।
दूसरी तरफ तात्कालिक सकारात्मक समाचारों के प्रभाव से भी कुछ सेक्टरों में मजबूती बनी हुई है। इस्पात एवं अन्य धातुओं की कीमतों में लगातार बढ़त के कारण मेटल शेयरों में खरीदी चल रही है। दूसरी ओर क्रूड ऑइल के भाव ऐतिहासिक उच्च स्तर पर पहुँचने के प्रभाव से ऑइल एंड गैस सेक्टर के शेयर्स भी मजबूत बने हुए हैं। प्राइमरी मार्केट में अभी गतिविधियाँ ठंडी पड़ी हुई हैं। हालाँकि बीते सप्ताह लिस्ट हुए रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन के शेयरों ने अधिकतम सीमा तक एप्लीकेशन लगाने वाले निवेशकों को एप्लीकेशन एमाउंट पर लगभग 2 प्रतिशत का लिस्टिंग गेन दिया है, जो कि बाजार के वर्तमान हालात को देखते हुए बहुत अच्छा है।
यदि 15 दिन पहले यह रुपया सेकंडरी मार्केट में लगा दिया जाता तो 5-7 प्रतिशत का नुकसान हो जाता। खैर, इस सप्ताह कोई इश्यू नहीं है। अगले सप्ताह 25 मार्च को किरी डाइज एंड केमिकल्स का इश्यू खुल रहा है। कंपनी 125 से 150 रु. के प्राइस बैंड पर शेयर जारी करेगी। इस सेक्टर के शेयरों में बड़े निवेशकों की विशेष दिलचस्पी नहीं है।
22 जनवरी से 14 मार्च 2008 तक * बीएसई स्मॉल केप इंडेक्स 19.43 प्रतिशत घटा। * बीएसई रियल्टी इंडेक्स 18.99 प्रतिशत घटा। * बीएसई बैंकेक्स 18.07 प्रतिशत घटा। * बीएसई केपिटल गुड्स इंडेक्स 17.46 प्रतिशत घटा।
* बीएसई हेल्थकेयर एवं एफएमसीजी इंडेक्स क्रमशः 9.91 प्रश एवं 9.46 प्रश बढ़े। * बीएसई मेटल इंडेक्स में 5.18 प्रतिशत की तेजी। * बीएसई ऑइल एंड गैस इंडेक्स 3.81 प्रतिशत बढ़ा। * बीएसई ऑटो इंडेक्स 1.42 प्रश बढ़ा। नोट : इस अवधि में निफ्टी लगभग 3.5 प्रश घटा है।
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