व्हाइट हाउस ने वित्तीय क्षेत्र के छः महारथी डॉक्टरों की सेवाएँ लेकर होम-लोन फोरक्लोजर या डिफॉल्ट कम करने के उपाय शुरू कर दिए हैं। अरब कंट्री के एक धनी निवेशक ने एक अमेरिकी वित्तीय संस्थान को संकट से उबारने के लिए अरबों डॉलर के बॉण्ड खरीद लिए हैं। उम्मीद से बेहतर जनवरी रिटेल सेल्स के आँकड़े भी बूस्टर डोज का काम कर रहे हैं। इन सब उपायों को देखते हुए एक अमेरिकी डॉक्टर ने अनुमान लगाया है कि मरीज की नब्ज डूबेगी नहीं, बल्कि सामान्य गति से चलना शुरू हो सकती है।
इसी बीच आईसीयू में पड़े निफ्टी एवं सेंसेक्स ने जोर-जोर से साँस लेना प्रारंभ कर दी है। इसे साँस उखड़ने की निशानी मानते हुए परिजनों में एक बार फिर कोहराम मच गया है। कोई डॉक्टर को बुलाने दौड़ा है तो कोई ज्योतिषियों की शरण में भागा है।
कुछ लोग प्रार्थनाएँ कर रहे हैं। लीजिए तकनीकी डॉक्टर सा. आ गए हैं। वे कह रहे हैं कि अगले 15 दिन क्रिटिकल हैं। यदि अगले 15 दिनों तक निफ्टी एवं सेंसेक्स के स्वास्थ्य में ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं होते हैं यानी थोड़ी स्थिरता बनी रहती है तो रिकवरी बहुत फास्ट होगी।
बहरहाल प्राइमरी मार्केट में कल से रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कार्पोरेशन का इश्यू खुल रहा है। सरकारी क्षेत्र के इस वित्तीय संस्थान का इश्यू आकर्षक भावों पर जारी हो रहा है। इसलिए इसमें संस्थागत निवेशकों का जोरदार रिस्पांस देखने को मिल सकता है।
5-7 दिन पहले यह खबर थी कि बाजार की हालत को देखते हुए इश्यू पर पुनर्विचार किया जाएगा यानी आम निवेशकों के साथ-साथ सरकार भी घबरा गई थी, लेकिन अब इश्यू तय समय एवं तय प्राइस बैंड पर ही जारी किया जाएगा। वैसे घबराहट में आकर इश्यू का प्राइस बैंड घटा दिया जाता तो बहुत अच्छा होता। 24 कैरेट गोल्ड 18 कैरेट का दाम चुका कर मिल जाता।
बड़े खिलाड़ियों ने की है जोरदार खरीदी सोमवार 11 फरवरी को बड़े खिलाड़ियों ने बाजार की गिरावट का लाभ उठाते हुए जोरदार खरीदी प्रारंभ की थी, जो शुक्रवार तक जारी रही। उस दिन आम निवेशक घबराहट में आकर बेचान कर रहे थे, जबकि जानकार निवेशक खरीदी में व्यस्त थे। सोमवार के निम्नतम भाव से शुक्रवार के क्लोजिंग भाव तक एस्सार ऑइल 42 प्रतिशत उछला है तथा यूनीटेक एवं रिलायंस केपिटल के भाव 34-34 प्रतिशत बढ़े हैं।
इसी अवधि में फ्यूचर की 31 कंपनियों के भाव 19 से 28 प्रतिशत तक उछले हैं और 102 शेयरों के भाव 10 से 19 प्रतिशत तक बढ़े हैं। तेजी से बढ़ने वाले फ्यूचर शेयरों में किसी में शार्टकवरिंग के कारण ओपन इंटरेस्ट की मात्रा मामूली घटी है तो किसी में लाँग पोजीशन के कारण ओपन इंटरेस्ट थोड़ा बढ़ा है। उक्त दोनों ही परिस्थितियों में निष्कर्ष यह निकल रहा है कि कैपिटल मार्केट में डिलीवरी उठाने के कारण ही संबंधित कंपनियों के फ्यूचर भाव बढ़े हैं।
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