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आईसीयू में भर्ती है पूरा बाजार
डॉ. मनमोहनसिंह की अनुभवी टीम से मदद का इंतजार
- शैलेन्द्र कोठारी

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान तीव्र उतार-चढ़ाव के बीच निचले स्तर पर मिले जोरदार समर्थन के सहारे निफ्टी कुल 183 प्वॉइंट्स बढ़कर 5303 पर बंद हुआ। बाजार सूत्रों का कहना है कि डरे-सहमे व्यवसायी एवं निवेशकों को इस सप्ताह हुए कामकाज को देखकर थोड़ा संबल मिला है। हालाँकि अनिश्चितता की प्रवृत्ति से बाहर आकर स्पष्ट ट्रेंड निर्धारण होने में अभी थोड़ा वक्त और लगेगा।

विश्लेषकों का कहना है कि मात्र एक-डेढ़ माह पहले विश्वभर के लगभग सभी प्रमुख सूचकांकों को पछाड़कर मैराथन चैंपियन बने निफ्टी एवं सेंसेक्स अपनी क्षमता से बहुत ज्यादा तेज गति से दौड़ लेने के कारण पस्त होकर अभी आईसीयू में भर्ती हैं तथा यहाँ जीवन एवं मृत्यु के बीच संघर्ष जारी है।

प्रधानमंत्री एवं वित्त मंत्री जैसे अनुभवी डॉक्टरों ने मरीज के लक्षण देखकर कहा है कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है, किंतु मरीज के परिजन यानी निवेशक मरीज की हालत देखकर धैर्य खो रहे हैं। देश के ख्यातनाम वित्तीय डॉक्टरों की टीम भी घोषणा कर चुकी है कि मरीज अभी कोमा में नहीं गया है, इसलिए आशा बनाए रखना चाहिए।

जानकार सूत्रों का कहना है कि म्यूच्युअल फंडों एवं दीर्घावधि निवेशकों ने खरीदीरूपी सलाइन चढ़ा रखी है, इसलिए मरीज को पर्याप्त जीवनी शक्ति मिल रही है।

हालाँकि परिजन सट्टात्मक खुराक नहीं मिल पाने के कारण थोड़े बेचैन हैं, लेकिन डॉक्टरों की माने तो इससे पाचनतंत्र को आराम मिल रहा है तथा मरीज की जीवनी शक्ति बेवजह खर्च होने से बच रही है, लेकिन एक चैंपियन को हमेशा दौड़ते एवं जीतते देखने के आदी मरीज के परिजन यानी निवेशक मरीज का आराम से सोना बिलकुल भी बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं।

इसी बीच तरह-तरह के शोर-शराबे एवं वातावरण में प्रवाहित हो रही नकारात्मक ऊर्जा के कारण कभी मरीज का बीपी लो हो जाता है तो कभी यह कुछ क्षण के लिए बेहोश हो जाता है। मरीज की हालत में हो रहे इस उतार-चढ़ाव को देखकर कुछ युवा परिजन ज्यादा बेचैन हैं, जबकि कुछ बुजुर्ग परिजन अपने अनुभव के आधार पर अभी निराश नहीं हुए हैं, क्योंकि उनका मानना है कि जब तक साँस है तब तक आस है बाकी जैसी हरि इच्छा।

बहरहाल, सीटी स्केन की रिपोर्ट में कोई खराबी नहीं पाई गई है, इसलिए विशेषज्ञ डॉक्टरों के दल ने कुछ और तरह की जाँच करवाने का निर्णय लिया है।

कुछ डॉक्टरों का मानना है कि अमेरिका से आए सब-प्राइम नामक वायरस का प्रकोप भी हो सकता है किंतु डॉक्टर मनमोहनसिंह एवं उनकी सुप्रतिष्ठित विशेषज्ञ टीम के सदस्यों का कहना है कि सिर्फ अटकलों के आधार पर इलाज नहीं हो सकता है, इसलिए पहले बीमारी का पता चले तो इलाज शुरू हो। हालाँकि एहतियात के तौर पर सभी जरूरी कदम उठाने की तैयारियाँ तो शुरू हो ही चुकी हैं।

उधर वाशिंगटन से प्राप्त जानकारी से संकेत मिल रहे हैं कि फेड रिजर्व डॉक्टर बेन बर्नानकी द्वारा इजाद किए गए इंटरेस्ट रेट कट नामक इंजेक्शन से बाजारों को काफी राहत मिल सकती है। उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ महीनों से अमेरिकी वित्तीय बाजार सब-प्राइम नामक खतरनाक वायरस की चपेट में है। इस वायरस का प्रभाव कम करने के लिए वित्तीय विशेषज्ञों की टीम जुटी हुई है, लेकिन इसे समूल नष्ट करने की दवाई अभी खोजी नहीं जा सकी है।

इसी बीच सब-प्राइम वायरस को कमजोर करने के लिए डॉ. वॉरेन बफेट ने अपनी सेवाएँ देने की पेशकश की है। डॉ. बफेट ने कहा है कि कुछ म्युनिसिपल कॉर्पोरेशंस के बॉण्ड हम रि-इंश्योर करेंगे। उनके इस बयान से निवेशकों का हौसला बढ़ा है। अपने प्यारे अर्थतंत्र को बचाने के लिए व्हाइट हाउस भी जी-जान से जुटा हुआ है।
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