- शैलेंद्र कोठारी यदि भारतीय अर्थव्यवस्था की बढ़त में रुकावट आती है तो उसका प्रभाव कुछ सेक्टरों या कंपनियों पर पड़ेगा, न कि बाजार में सूचीबद्ध सभी कंपनियों पर। इसलिए निवेशक बाजार में होने वाली गतिविधियों पर चौकस नजर रखते हुए बड़े खिलाड़ियों के कामकाज करने के तौर-तरीकों को ठीक से समझें तो निफ्टी एवं सेंसेक्स में निचला सर्किट लगने का भय दूर हो जाएगा।
साथ ही निवेश की पाठशाला में नए-नए अध्याय सीखने को मिलेंगे। भारत के अधिकांश ट्रेडर्स फ्यूचर कामकाज करते हुए मई-2004 में पिटाए, मई-2006 में रुपया खोया और जनवरी-2008 में भी श्रेणी सुधार नहीं हुआ!! एक क्लास में तीन बार फेल होना बहुत बुरी बात है।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान अनिश्चित एवं तीव्र उतार-चढ़ाव के बीच निफ्टी कुल 343 प्वाइंट्स घटकर 5120 पर बंद हुआ। व्यवसायियों का कहना है कि इन दिनों डे-ट्रेडिंग के अलावा बाजार में कोई विशेष गतिविधियाँ नहीं हैं, क्योंकि वर्तमान स्तर पर निवेशक अपने शेयर्स नहीं बेच पा रहे हैं और विभिन्न नकारात्मक समाचारों के प्रवाह ने मनोबल इतना तोड़ दिया है कि नई खरीदी का हौसला संस्थागत निवेशकों को छोड़कर किसी में भी नहीं बचा है।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था मंदी की गर्त में जा सकती है और इसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था की प्रगति रफ्तार पर भी पड़ेगा। ऐसी आशंकाएँ निवेशकों को भयभीत कर रही हैं, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि मात्र 2-3 प्रतिशत की जीडीपी ग्रोथ के बावजूद अमेरिकी शेयर बाजार संभले हुए हैं यानी परिपक्वता का परिचय दे रहे हैं, जबकि 8-9 प्रतिशत की जीडीपी ग्रोथ में कुछ कमी आने की अटकलों के आधार पर भारतीय बाजार ओवर-रिएक्ट कर रहे हैं।
एफआईआई का नजरिया एक विदेशी फंड मैनेजर का कहना है कि अनेक फंड हाउस स्थिति का समग्र रूप से आकलन कर रहे हैं, लेकिन हड़बड़ी में बेचान करने के पक्ष में तो शायद ही कोई हों। यदि बाजार में मंदड़िया दौर की शुरुआत होगी तो पहले कमजोर कार्पोरेट अर्निंग के लक्षण उत्पन्न होंगे।
निफ्टी में मंदी का दौर शुरू होगा तो यह व्यवस्थित तरीके से नीचे उतरेगा। फ्री-फाल की स्थिति तो अत्यधिक सट्टात्मक पोजीशन लेने के कारण बनती है और अभी बाजार में ऐसे लोग ही मौजूद नहीं हैं। यहाँ तो सिर्फ ऐसे निवेशक बचे हैं, जो 750-800 रुपए का एसीसी यह सोचकर खरीद रहे हैं कि कंपनी की ग्रोथ एवं वेल्यूएशन को देखते हुए 3 से 6 महीने में भाव धीरे-धीरे बढ़कर1100 रुपए पर पहुँच जाएँगे।
सही पूछा जाए तो कोई सेल व टिस्को में खरीदी कर रहा है तो कोई एनटीपीसी में। ग्रोथ स्टॉक्स की बात छोड़िए, एमटीएनएल जैसे अंडरपरफार्मर स्टॉक में वर्तमान भाव पर जाने को क्या है? हाँ, यह बात जरूर है कि कुछ शेयरों में जाने को बहुत कुछ है, जैसे ब्रोकरेज कंपनियों के स्टॉक।
भारी गिरावट के दौर में क्लाइंटों को हुए नुकसान का कुछ हिस्सा ब्रोकरेज कंपनियों को भी भुगतना पड़ा होगा और यदि बाजार मंदड़िया दौर में प्रवेश करता है तो सबसे ज्यादा संकट ब्रोकिंग कंपनियों के सामने ही खड़ा होगा तो ऐसे रिस्की शेयरों या सेक्टर से बाहर निकल जाना चाहिए और मजबूत स्टॉक में बने रहना चाहिए।
इसके अलावा रियल एस्टेट क्षेत्र की कंपनियों से भी दूर रहना चाहिए, क्योंकि इनके शेयरों एवं जमीन में फुगावा ज्यादा है। अर्थव्यवस्था में किसी भी प्रकार का स्लो डाउन होने की दशा में इनके फुग्गे सबसे पहले फूटेंगे, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर, पावर इत्यादि कुछ ऐसे सेक्टरहैं, जिनकी प्रगति रुकना संभव ही नहीं है और जब इंफ्रास्ट्रक्चर एवं पावर सेक्टर अच्छे बने रहेंगे तो फिर स्टील, सीमेंट तथा बैंकिंग व फाइनेंस सेक्टर भी प्रगति करेंगे ही।
तकनीकी सलाह तकनीकी विश्लेषकों का कहना है कि बाजार में होता हुआ तो बहुत कुछ दिख रहा है, किंतु वास्तव में कुछ नहीं हो रहा है। 21-22 जनवरी को हड़बड़ी में हुए बेचान की बात छोड़ दी जाए तो अभी 23 जनवरी को निफ्टी द्वारा बनाया गया 4892 का लो नहीं टूटा है और इसके बाद 12 ट्रेडिंग सेशन के दौरान निफ्टी ने हॉयर-बॉटम-हायर-टॉप पैटर्न बनाया है और यह पैटर्न तभी टूटेगा, जब निफ्टी 5070 के नीचे निर्णायक रूप से बंद हो जाए।
शुक्रवार को अंतरदिवसीय कामकाज के दौरान निफ्टी 5070 के नीचे जरूर गया था, किंतु शार्प रिकवरी केकारण इस स्तर से ऊपर आकर ही बंद हुआ है। इसलिए 5070 एवं 4892 दो ऐसे स्तर हैं, जिनको तोड़ने के बाद ही निफ्टी की चाल बिगड़ेगी, लेकिन बिगड़कर भी कितनी बिगड़ेगी? इसलिए आम निवेशक भयभीत न हो।
इश्युओं का पिटना सकारात्मक कई नए इश्युओं को मिले कमजोर रिस्पांस एवं वॉकहार्ट व एम्मार एमजीएफ के इश्यू फ्लॉप हो जाने की घटना भी निवेशकों को डरा रही हैं, किंतु इश्यू अनाप-शनाप प्रीमियम पर आए इसलिए पिटाए हैं और इस घटना का सकारात्मक पहलू तो यह है कि अब प्रमोटर्स की लालची प्रवृत्ति पर अंकुश लगेगा यानी इश्यू वाजिब दामों पर आएँगे तथा निवेशकों को कमाने के पर्याप्त अवसर मौजूद रहेंगे।
निष्कर्ष यह है कि प्राइमरी मार्केट में भी साफ-सफाई का दौर चल रहा है। इसलिए इसमें निवेशकों को डरने की कोई जरूरत नहीं है और प्रमोटर्स घबराएँ यह तो बहुत अच्छी बात है।
वैसे तो शुक्रवार शाम को ग्रे-मार्केट प्रीमियम 100 रुपए के आसपास थी, किंतु इश्यू खुलने के पहले व मार्केट क्रेश होने के बीच ग्रे-मार्केट में बहुत ऊँचे-ऊँचे भावों पर सौदे हुए हैं और अब इन सौदों का भुगतान मुश्किल है।
इस कारण ग्रे-मार्केट भावों पर भरोसा नहीं किया जा सकता है, लेकिन रिलायंस का अर्थ विश्वास है। इसलिए उम्मीद है कि रिटेल इंवेस्टर्स निराश नहीं होंगे। 25-26 हजार रुपए की एप्लीकेशन लगाकर 20 दिन में 1500 से 2000 रुपए मिले तो यह शानदार रिटर्न होगा।
जे. कुमार इंफ्रा एवं कॉर्ड्स केबल के अलॉटमेंट फाइनल हो चुके हैं। इन दोनों इश्युओं के अलॉटमेंट थोक में उतरे हैं। इनके बाद आए इश्युओं में भी निवेशकों द्वारा माँगे गए शेयर्स पूरे मिलने की संभावनाएँ हैं। वर्तमान परिस्थितियों में जब निवेशक रिलायंस पावर को लेकर आशावादी नहीं हैं तो अनुमान लगाया जा सकता है कि बाकी इश्युओं का लिस्टिंग पर क्या हश्र होगा?
आईटी सर्विस प्रोवाइडर कंपनी जीएसएस अमेरिका इंफोटेक का इश्यू आज खुल रहा है। कंपनी का वित्तीय रिकॉर्ड अच्छा है। हालाँकि इसी क्षेत्र की अन्य लिस्टेड कंपनियों की तुलना में तथा बाजार की वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए इश्यू थोड़े महँगे भाव पर जारी हो रहा है। इसलिए संस्थागत निवेशकों का रिस्पांस देखने के बाद ही इस इश्यू में एप्लीकेशन लगाने या न लगाने संबंधी निर्णय लेना चाहिए।
वैसे आगामी 19 तारीख को रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉर्पोरेशन का इश्यू खुल रहा है। सरकारी क्षेत्र की इस कंपनी का इश्यू एकदम वाजिब भावों पर जारी हो रहा है। इस कंपनी में दीर्घावधि निवेश के साथ लिस्टिंग पर भी लाभ कमाया जा सकता है। अतः अपनी ऊर्जा एवं रुपए को बचाकर रखें। इन दोनों चीजों की बचत व्यक्ति एवं परिवार को उन्नत बनाती है।
|