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गोलमाल है भाई सब गोलमाल है....
ऑर्डर के लिए सप्‍ताह के विभिन्‍न वारों का जैसे रविवार एक लाख, सोमवार दो लाख....यूज किए जाते हैं। इसी तरह तय समय या महीने की अमुक तारीख का सहारा लिया जाता है।

इसी तरह एक शेयर के लिए दूसरे शेयर के नाम का सहारा लिया जाता है। मसलन इस्‍पात इंडस्‍ट्रीज अच्‍छा लगता है तो इसका अर्थ होगा कि टिस्‍को में खरीद करें। यदि टिस्‍को बेचना हो तो कहा जाएगा कि इस्‍पात कमजोर लग रहा है।

1990 के दशक के मध्‍य से 2004 तक फ्रंट रनिंग काफी आक्रामक रुप से चलता था। इस समय फ्रंट रनिंग के बारे में शेयर बाजार के खिलाड़ी एकमत नहीं हैं। कुछ खिलाड़ी कहते हैं कि पहले बाजार सीमित दायरे में चलता था और मुनाफा कमाने का मौका बहुत कम मिलता था, ऐसे में फ्रंट रनिंग खूब होता था लेकिन अब बाजार काफी व्‍यापक है और मुनाफा कमाने के मौके खूब हैं, जिससे फ्रंट रनिंग नहीं होता।

इस समय शेयर बाजार के खिलाड़ी अपने अनुमान से कहीं अधिक कमा रहे हैं। इस वजह से कोई खिलाड़ी अपने कैरियर को दांव पर नहीं लगाएगा। जबकि अनेक खिलाड़ी कहते हैं कि फ्रंट रनिंग कम नहीं हुआ है। बल्कि अब खूब बड़े सौदे होते हैं और खिलाड़ियों को कैश सौदों में रुचि नहीं है। संस्‍थागत निवेशकों की रुचि एफ एंड ओ में बढ़ रही है। फ्रंट रनिंग के खेल में इक्विटी सेल्‍स स्‍टॉफ और डीलर तो केवल मोहरे हैं।

खेल तो चालू है : सेबी ने हाल में यूटीआई सिक्‍युरिटीज के एक डीलर, एमके शेयर एंड स्‍टॉक ब्रोकर्स के एक सब ब्रोकर और प्रयास सिक्‍युरिटीज के एक निदेशक पर बल्‍लारपुर इंडस्‍ट्रीज के शेयर में कारोबार करने संबंधी रोक लगाई है।

यह रोक कथित फ्रंट रनिंग की वजह से लगाई गई है। सेबी ने फ्रंट रनिंग के तहत यह पहला कदम उठाया है। हालांकि, फ्रंट रनिंग और इनसाइडर ट्रेडिंग को साबित करना काफी कठिन होता है। सेबी को यदि ऐसे खिलाड़ियों के फोन और ई-मेल पर नजर रखने का अधिकार मिले तो काफी हद तक ऐसे गोलमाल पर काबू पाया जा सकता है। (साभार वाह ! मनी)
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