पिछले पाँच सप्ताह से लंबी छलाँग लगा रहे देश के शेयर बाजारों में आगामी सप्ताह उतार-चढ़ाव के बीच तेजी का सिलसिला बने रहने की अधिक संभावना है।
बीते सप्ताह बम्बई शेयर बाजार (बीएसई) का सेंसेक्स 727 अंक और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 184 अंक की लंबी छलाँग के साथ क्रमश: 17291 तथा 5021 अंक के नए शिखर पर पहुँच गए।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि हाल के सप्ताहों के दौरान शेयर बाजारों में आई अभूतपूर्व तेजी के बाद तकनीकी सुधार की गुंजाइश बनी हुई है, किंतु इससे घबराने की जरूरत नहीं है।
दिल्ली शेयर बाजार के पूर्व अध्यक्ष और ग्लोबल कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड के प्रमुख अशोक कुमार अग्रवाल आगामी सप्ताह बाजार को लेकर आशान्वित लग रहे हैं।
उनका कहना है कि वर्तमान में जो कारक हैं, उनमें से अधिकांश तेजी की तरफ दर्शाते हैं, किंतु अमेरिका के साथ परमाणु समझौते पर वाम दलों का ताजा रुख कुछ चिंता पैदा करने वाला है।
माकपा के वरिष्ठ नेता ज्योति बसु जो देश में बिजली की जरूरतों को पूरा करने के लिए परमाणु ऊर्जा को जरूरी बता रहे थे। उनके ताजा बयान ने कहा कि अमेरिका के साथ समझौते पर पार्टी नरम नहीं पड़ेगी। राजनीतिक अनिश्चितता को फिर से बढ़ा सकता है।
अग्रवाल का कहना है कि मुद्रास्फीति की दर में लगातार गिरावट और विदेशी संस्थानों की जोरदार सक्रियता से देश के शेयर बाजारों को नई मजबूती मिली है, किंतु सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र को लेकर माहौल बहुत उत्साहवर्द्धक नहीं है। रुपए की मजबूती और अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मंदी इस क्षेत्र के लिए चिंता का विषय है। देश की सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की अग्रणी कंपनियों की आय का एक बहुत बड़ा हिस्सा अमेरिका से ही आता है। अट्ठारह सितम्बर को अमेरिका के फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों में आधा प्रतिशत की कटौती किए जाने के बाद देश के शेयर बाजारों में तेजी की बयार बह रही है। इस बयार का परिणाम यह हुआ कि बीएसई का सेंसेक्स मात्र सात कारोबारी दिवस में एक हजार अंक की तेजी पाने का रिकॉर्ड बनाने में सफल हुआ। एनएसई के निफ्टी ने भी अपने इतिहास में एक हजार अंक की बढ़त पाने के लिए सबसे कम समय लिया।
बीते सप्ताह बीएसई का सेंसेक्स 726.87 अंक अर्थात 4.39 प्रतिशत की छलाँग से 17291.10 अंक पर बंद हुआ। शुक्रवार को कारोबार में इसने 17361.47 अंक का रिकॉर्ड बनाया। एनएसई का निफ्टी 183.80 अंक अर्थात 3.79 प्रतिशत से बढ़कर 5021.35 अंक की नई ऊँचाई पर पहुँच गया। शुक्रवार को यह रिकॉर्ड 5055.80 अंक तक गया।
बीएसई में सेंसेक्स के अलावा मिडकैप 222.51 अंक अर्थात 3.09 प्रतिशत से बढ़कर 7422.43 अंक और स्मॉलकैप 204.63 अंक यानि 2.3 प्रतिशत बढ़कर 9099.93 अंक पर बंद हुए।
विदेशी संस्थान देश के शेयर बाजारों में पूरी तरह सक्रिय हैं। फेडरल रिजर्व के ब्याज दर घटाने के बाद मात्र आठ कारोबारी दिवसों में यह करीब दो अरब डॉलर का निवेश कर चुके हैं। इस वर्ष इनका निवेश 11 अरब डॉलर को पार कर चुका है। सितम्बर माह में विदेशी संस्थानों का निवेश तीन अरब डॉलर से ऊपर निकल गया है।
गत सप्ताह पाँचों कारोबारी दिवसों में सेंसेक्स ने तेजी की धूम मचाए रखी। रिलायंस एनर्जी, एनटीपीसी, मारुति, भारती एयरटेल, भेल, रिलायंस इंडस्ट्रीज, सत्यम कंप्यूटर, इंफोसिस टेकनोलॉजीस, टीसीएस, विप्रो, टाटा स्टील, एसबीआई, आईसीआईसीआई बैंक और हिंडाल्को इंडस्ट्रीज सेंसेक्स के फायदे वाले प्रमुख शेयरों में रहे।
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