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शेयर बाजार में तेजी रहने की संभावना
नित रिकॉर्ड दर रिकॉर्ड बना रहे देश के शेयर बाजारों का पहिया आगामी सप्ताह भी तेजी से धूमते रहने की अधिक संभावना है।

इक्कीस सितंबर को समाप्त हुए सप्ताह में बंबई शेयर बाजार (बीएसई) का सेंसेक्स 960 अंक और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 320 अंक की भारी बढ़त के साथ क्रमश: 16564.23 तथा 4837.55 अंक के सर्वकालीन शिखर पर बंद हुए।

बाजार विश्लेषकों को उम्मीद थी कि अर्थव्यवस्था की मंदी को देखते हुए फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में चौथाई प्रतिशत की कटौती तो अवश्य ही करेगा, किंतु आधा प्रतिशत की कटौती को पूरे विश्व के वित्तीय बाजारों में हाथों हाथ लिया गया और इसका असर अभी बने रहने की संभावना हैं। फेडरल रिजर्व के इस फैसले से बुधवार को देश के शेयर बाजारों ने एक दिन की सर्वाधिक बढ़त बनाने का रिकॉर्ड बनाया।

ग्लोब कैपीटल मार्केट्स लिमिटेड के प्रमुख और दिल्ली शेयर बाजार के पूर्व अध्यक्ष अशोक कुमार अग्रवाल का मानना है कि बाजार में तेजी की पूरी-पूरी संभावना है। फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों में कटौती के साथ ही मुद्रास्फीति के आठ सितंबर को समाप्त हुए सप्ताह में पिछले पाँच वर्ष के निम्न स्तर 3.32 प्रतिशत पर आ जाना शेयर बाजारों के लिए अच्छा संकेत हैं।

अग्रवाल का कहना है कि डॉलर के मुकाबले रुपए की मजबूती और कच्चे तेल की रिकॉर्ड कीमतें चिंता का विषय भी हैं। रुपए की मजबूती ने देश की सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों के शेयरों को खासा प्रभावित किया है। अग्रवाल का कहना है कि अमेर‍िका की अर्थव्यवस्था की मंदी का भी असर सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों पर है, किंतु वह मानते हैं कि फेड के ब्याज दरों में की गई कटौती का असर अमेर‍िका की मंदी को दूर करने में सहायक होगा और इसका देर-सबेर आईटी कंपनियों को फायदा मिलने की उम्मीद है।

आगामी सप्ताह गुरुवार 27 सितंबर को चालू माह के लिए वायदा एवं विकल्प कारोबार का निपटान होना है, जिसे देखते हुए बाजार में शॉर्ट कवरिंग को पूरा करने का जोर रहने की उम्मीद है।

विदेशी संस्थानों को भी देश के शेयर बाजार खूब भा रहे हैं। पिछले सप्ताह विदेशी संस्थानों ने 4471 करोड़ 33 लाख रुपए का निवेश किया। इसमें 21 सितंबर को 762 करोड़ 13 लाख प्रारंभिक आँकड़ा भी शामिल है।

सप्ताह के दौरान हालाँकि साझा कोष ज्यादतर दिवसों में बिकवाल रहे। इसके बावजूद इन्होंने 32 करोड़ 10 लाख रुपए का निवेश किया।

बीते सप्ताह देश के शेयर बाजारों की शुरुआत हालाँकि मंदे के साथ हुई थी, लेकिन फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों की कटौती के समाचारों ने बाजार में ऐसी जान फूँकी की यह रिकॉर्ड दर रिकॉर्ड बनाता चला गया। सप्ताह के दौरान सेंसेक्स 6.16 प्रतिशत अर्थात 960.43 अंक की बढ़त से 16564.23 अंक के रिकॉर्ड पर बंद हुआ। वैसे शुक्रवार को इसने कारोबार के दौरान 16616.84 अंक पर पहुँचने का रिकॉर्ड कायम किया।

एनएसई का निफ्टी 4855.70 अंक का रिकॉर्ड बनाने के बाद सप्ताहांत 4837.55 अंक पर 319.55 अंक अर्थात सात प्रतिशत ऊँचा बंद हुआ। तेजी की इस बयार में बीएसई का मिडकैप 302.92 अंक अर्थात 4.39 प्रतिशत और स्मॉलकैप 322.54 अंक यानी 3.76 प्रतिशत बढ़कर क्रमश: 7199.92 अंक तथा 8895.30 अंक पर बंद हुए।

गत सप्ताह बुधवार को सेंसेक्स में 653.63 अंक अर्थात 4.17 प्रतिशत की बढ़त का रिकॉर्ड बना। इससे पहले सेंसेक्स में एक ही दिन में सर्वाधिक बढ़त पिछले साल 15 जून को 615.62 अंक की थी।

फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों में कमी किए जाने के बावजूद रिजर्व बैंक के फिलहाल इस दिशा में कोई कदम उठाने की संभावना कम नजर आ रही है। बाजार विश्लेषक मान रहे हैं कि रिजर्व बैंक इंतजार करना अधिक पसंद करेगा।

उधर आवास ऋणों में गिरावट की चर्चा शुरू होने लगी है। ऐसी प्रबल संभावना है कि एचडीएफसी आगामी सप्ताह इसे आधा प्रतिशत घटा सकता।

बीते सप्ताह रिलायंस इंडस्ट्रीजल भेल, एसबीआई, आईसीआईसीआई बैंक, ओएनजीसी, मारुति सुजुकी, रिलायंस कम्युनीकेशंस, रिलायंस एनर्जी और एलएंडटी सेंसेक्स में जोरदार बढ़त पाने वाले शेयरों में शामिल थे। रिलांयस इंडस्ट्रीज के शेयर में 11 प्रतिशत की जोरदार बढ़त रही। इस समूह का रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर का शेयर 75 प्रतिशत बढ़ गया। रिलांयस एनर्जी 14 प्रतिशत ऊपर रहा।

तेजी की इस बयार में रुपए की मजबूती ने आईटी कंपनियों के शेयरों को दबाए रखा। इस क्षेत्र की पहली चार बड़ी कंपनियों टीसीएस, इंफोसिस टेकनोलॉजीस, विप्रो और सत्यम के शेयर में नुकसान रहा।

केन्द्रीय कृषि मंत्री शरद पवार के बयान है कि सरकार चीनी मिलों को और वित्तीय रियायतें देंगी, इस क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों में भी अच्छी तेजी देखने को मिली।
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