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शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव की संभावना
कच्चे तेल की रिकॉर्ड ऊँची कीमतें और ब्रिटेन के नार्दन राक के संकट के चलते देश के शेयर बाजारों में अगले सप्ताह उतार-चढ़ाव की अधिक संभावना है। बीते सप्ताह बंबई शेयर बाजार (बीएसई) का सेंसेक्स लगातार तीसरे हफ्ते बढ़ता हुआ 13 अंक और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी नौ अंक ऊँचा बंद हुआ।

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल, जो परिस्थितियाँ हैं, उन्हें देखते हुए शेयर बाजारों में उठापटक की अधिक संभावना बनी हुई है, हालाँकि मुद्रास्फीति 0.27 प्रतिशत और गिरकर दो वर्ष के न्यूनतम स्तर पर आई है, किंतु कच्चे तेल की रिकॉर्ड कीमतें, औद्योगिक उत्पादन में गिरावट और ब्रिटेन के नार्दन राक का वित्तीय संकट बाजार पर भारी पड़ सकता है।

ग्लोब कैपीटल मार्केट्स लिमिटेड के प्रमुख और दिल्ली शेयर बाजार के पूर्व अध्यक्ष अशोक कुमार अग्रवाल का मानना है कि सबसे पहले, तो कारोबारियों की निगाहें 18 सितंबर को अमेर‍िका के फेडरल रिजर्व की होने वाली बैठक में है। इस बैठक में क्या फैसला होता है इसका शेयर बाजार पर खासा असर होने के कयास लगाए जा रहे हैं।

अग्रवाल का कहना है कि जैसी की प्रबल संभावना है कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में चौथाई प्रतिशत कमी कर सकता है। उन्होंने कहा कि अगर ब्याज दरों में इतनी ही कमी होती है, तो इसका कोई विशेष लाभ नहीं होने वाला है। ब्याज दरों में अगर कमी नहीं की गई, तो बाजार दबाव में आ सकते है।

उन्होंने कहा कि घरेलू मुहाने पर मुद्रास्फीति में गिरावट अच्छी खबर है, किंतु औद्योगिक उत्पादन में गत अक्टूबर के बाद सबसे कम 7.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी निराश करने वाली है। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की रिकॉर्ड कीमतों का भी बाजार पर असर पड़ने का अंदेशा है। ब्रिटेन के नार्दन राक का वित्तीय संकट भी बाजार को प्रभावित कर सकता है।
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