कार्पोरेट गतिविधियाँ | आर्थिक मंदी | समाचार | साप्ताहिक समीक्षा
मुख पृष्ठ » खबर-संसार » शेयर बाजार » समाचार » योजना आयोग की नई पहल की योजना
Feedback Print Bookmark and Share
 
योजना आयोग ने आक्रामक ढंग से विनिवेश प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की वकालत करते हुए बुधवार को कहा कि सार्वजनिक उपक्रमों में सरकारी हिस्सेदारी की बिक्री से प्राप्त धनराशि का उपयोग नई निवेश परियोजनाओं में किया जाना चाहिए।

आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने यहाँ आर्थिक संपादकों के सम्मेलन में कहा, ‘सबसे पहले हमें आक्रामक होना चाहिए। फिर विनिवेश से मिली रकम का उपयोग नए निवेश में होना चाहिए।’

उन्होंने कहा कि विनिवेश प्रक्रिया को तेज करने और उससे प्राप्त धनराशि को नई परियोजनाओं में लगाने की रूपरेखा वित्त मंत्रालय को विकसित करनी चाहिए। उनसे सवाल किया गया था कि क्या विनिवेश से हासिल रकम का इस्तेमाल राजकोषीय घाटे में आए अंतर को पाटने के लिए किया जाना चाहिए।

सरकार ने ऑयल इंडिया और एनएचपीसी में अपने शेयरों की बिक्री चालू वित्त वर्ष में की है। उसने एनटीपीसी, सतलज जल विद्युत निगम और ग्रामीण विद्युतीकरण निगम में भी अपनी हिस्सेदारी कम करने की योजना का खुलासा किया है।

वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने कल इस सम्मेलन में कहा था कि एनएचपीसी और ऑयल इंडिया के बाद सरकार जरूरत पड़ने पर कुछ अन्य सार्वजनिक उपक्रमों में अपनी हिस्सेदारी का कुछ अंश घरेलू बाजार में बेचेगी और सरकारी कंपनियों की धन संबंधी जरूरतों को पूरा करने को ताजा इक्विटी भी जारी करेगी।

यह पूछने पर कि इन कंपनियों का विनिवेश कब किया जाएगा उन्होंने कहा, ‘जब हम बाजार में सबसे ज्यादा फायदा देखेंगे, उसी समय शेयर बेचेंगे।’ मुखर्जी ने कहा था कि हमने पिछले तीन महीने में काफी प्रगति की है। सूचीबद्ध कंपनियों की सार्वजनिक पेशकश से उन्हें फायदा हुआ है और उनका बाजार पूँजीकरण बढ़ा है।

उन्होंने कहा, ‘एनएचपीसी और ऑयल इंडिया की हाल में संपन्न सार्वजनिक पेशकश में पाया गया कि सूचीबद्ध होने के बाद इन कंपनियों का बाजार पूँजीकरण क्रमश: 18, 280 करोड़ रुपए और 9844 करोड़ रुपए से बढ़कर क्रमश: 37, 702 करोड़ रुपए और 27, 220 करोड़ रुपए हो गया। यह क्रमश: 106 प्रतिशत और 177 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाता है।’
संबंधित जानकारी खोजें