वैश्विक वित्त संकट की सुनामी की लहरों और पहली छमाही की ऋण एवं मौद्रिक नीति में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किए जाने से निराश निवेशकों की बिकवाली की आँधी ने शुक्रवार देश के शेयर बाजारों में भारी तबाही मचाई।
बम्बई शेयर बाजार (बीएसई) का सेंसेक्स अब तक की दूसरी बड़ी गिरावट के साथ 35 माह के न्यूनतम स्तर 8701.07 अंक पर बंद हुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के निफ्टी का इससे भी बुरा हाल रहा और यह 359 अंक के रिकॉर्ड नुकसान के साथ 2584 अंक रह गया।
कारोबार की शुरुआत से ही बाजार मंदी की गिरफ्त में था, किंतु नीति की घोषणा के बाद तो पूरी तरह से अफरा-तफरी देखी गई। रिजर्व बैंक ने नीति में किसी प्रकार का बदलाव नहीं करते हुए चालू वित्तवर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का अनुमान भी पहले के आठ प्रतिशत से घटाकर 7.5 से आठ प्रतिशत कर दिया।
बाजार सूत्रों के अनुसार वर्तमान वैश्विक वित्त संकट को देखते हुए हाल के उपायों के बाद किसी बडे़ बदलाव की उम्मीद नहीं थी, किंतु बाजार कुछ उम्मीद लगाए बैठा था, किंतु उसे पूरी तरह निराशा हाथ लगी।
यात्री कार वर्ग की अग्रणी कंपनी मारुति सुजुकी लिमिटेड और भेल समेत कई अन्य कंपनियों के घोषित परिणामों ने बाजार को और नीचे धकेलने में मदद की।
सेंसेक्स सत्र के शुरू में गुरुवार के 9771.70 अंक की तुलना में 235 अंक नीचे 9535.41 अंक पर खुला और इसके मुकाबले मात्र 35 अंक ऊपर जाने के बाद 8566.82 अंक तक लुढ़का और समाप्ति पर कुल 1070.63 अंक अर्थात 10.96 प्रतिशत की भारी गिरावट से 24 नवम्बर 2005 के बाद के न्यूनतम स्तर 8701.07 अंक पर बंद हुआ।
चौबीस नवम्बर 2005 को सेंसेक्स का स्तर 8744.04 अंक था। सेंसेक्स में अंकों के लिहाज से अब तक की रिकॉर्ड गिरावट इसी वर्ष 21 जनवरी को 1408 अंक थी।
वैश्विक वित्त संकट से सबसे प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में बिकवाली की मार सबसे अधिक पड़ी। रियलिटी वर्ग का सूचकांक 24.39 प्रतिशत अर्थात 562.31 अंक की गिरावट से 1743.27 अंक रह गया। रियलिटी वर्ग की कई बड़ी कंपनियों के संकट में फँसने की आशंका जताई जा रही है।
कच्चे तेल के लुढ़कने से ऑइल एंड गैस कंपनियों के शेयर भी औंधे मुँह नीचे आए। इस वर्ग का सूचकांक 14.97 प्रतिशत अर्थात 906.64 अंक की गिरावट से 5151.64 अंक पर बंद हुआ।
एनएसई का निफ्टी 359 अंक अर्थात 12.20 प्रतिशत की भारी गिरावट से 2584 अंक पर बंद हुआ। निफ्टी का यह स्तर 16 नवम्बर 2055 के 2582.75 अंक के बाद न्यूनतम है।
बीएसई के किसी भी वर्ग का सूचकांक बिकवाली के थपेड़ों से बच नहीं सका। मिडकैप और स्मालकैप में क्रमशः 8.38 तथा 7.66 प्रतिशत का नुकसान हुआ। समाप्ति पर यह 283.04 अंक तथा 303.87 अंक के नुकसान से 3095.68 और 3661.83 अंक पर बंद हुए।
धातु और बैंकेक्स सूचकांक में क्रमशः 12.62 तथा 12.07 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। यात्री कार वर्ग की अग्रणी कंपनी मारुति का चालू वित्तवर्ष की दूसरी तिमाही में शुद्ध लाभ पिछले साल के मुकाबले 37 प्रतिशत गिरा और ऑटोमोबाइल सूचकांक की 10.43 प्रतिशत की गिरावट में इसका बड़ा योगदान रहा।
सीएनएक्स मिडकैप 8.11 प्रतिशत और निफ्टी जूनियर 9.84 प्रतिशत नीचे आए। एशिया के शेयर बाजारों का भी बुरा हाल था। चीन, जापान, कोरिया और हांगकांग के शेयर बाजार कई वर्ष के न्यूनतम स्तर पर बंद हुए। बीएसई में बिकवाली का दबाव इतना अधिक था कि कुल 2627 कंपनियों के शेयरों के कामकाज में मात्र 262 अर्थात 9.97 कंपनियों के शेयर ही बढ़त पा सके। नुकसान वाली कंपनियों की संख्या 2319 अर्थात 88.28 प्रतिशत रही। मात्र 46 कंपनियों के शेयरों में कोई उठापटक नहीं थी। सेंसेक्स में शामिल सभी 30 कंपनियों के शेयरों में गिरावट रही और नुकसान वाले पहले बीस शेयरों में घाटा दस प्रतिशत से ऊपर था।
रियलिटी वर्ग की अग्रणी डीएलएफ का शेयर 23.96 प्रतिशत अर्थात 64.25 रुपए के नुकसान से 203.90 रुपए का रह गया। कारोबार के दौरान यह 200 रुपए से नीचे 194.20 रुपए तक लुढ़का। औषधि कंपनी रैनबैक्सी का शेयर भी 184.40 रुपए तक टूटने के बाद समाप्ति पर 17.83 प्रतिशत अर्थात 41 रुपए की गिरावट से 188.95 रुपए पर बंद हुआ।
धातु कंपनियों के शेयरों का हाल भी बुरा था। वैश्विक मंदी में धातु की माँग में गिरावट की आशंका से हिंडाल्को इंडस्ट्रीज का शेयर 17.82 प्रतिशत अर्थात 9.40 रुपए के नुकसान से 43.35 रुपए रह गया। टाटा मोटर्स को 162.75 रुपए पर 16.64 प्रतिशत अर्थात 32.25 रुपए का झटका लगा।
निजी क्षेत्र के अग्रणी बैंक आईसीआईसीआई बैंक के शेयर को 15.20 प्रतिशत का झटका लगा। नीचे में 305 रुपए तक गिरने के बाद बैंक का शेयर 55.55 रुपए के नुकसान से 310 रुपए पर बंद हुआ।
आईटी वर्ग की अग्रणी टीसीएस का शेयर सेंसेक्स के नुकसान वाली पहली बीस कंपनियों के शेयरों में सबसे नीचे था और इसकी गिरावट 10.46 प्रतिशत रही। सत्र की समाप्ति पर 57.25 रुपए के नुकसान से यह 490.20 रुपए पर बंद हुआ।
रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर 199.75 रुपए अर्थात 16.44 प्रतिशत के नुकसान से 1015.50 रुपए रह गया। महिन्द्रा एंड महिन्द्रा, आरकॉम, ओएनजीसी, स्टरलाइट इंडस्ट्रीज, रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर, टाटा स्टील, टाटा पॉवर, विप्रो, भारती एयरटेल, एसबीआई, जयप्रकाश एसोसिएट्स, ग्रासिम इंडस्ट्रीज और एचडीएफसी के शेयर सेंसेक्स के नुकसान वाली पहली बीस कंपनियों के अन्य शेयर थे। |