वैश्विक वित्तीय संकट और मंदी से कंपनियों की आय प्रभावित होने और उभरते बाजारों में निवेश गिरने की आशंकाओं के गहराने से देश के शेयर बाजारों में गुरुवार को भारी बिकवाली का दबाव रहा। बम्बई शेयर बाजार (बीएसई) का सेंसेक्स 398 अंक की जोरदार गिरावट से दस हजार अंक से नीचे लुढ़कता हुआ 28 माह के न्यूनतम स्तर 9771.70 अंक पर बंद हुआ।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी भी 27 माह के बाद पहली बार 3000 अंक से नीचे लुढ़क गया। अमेरिका शेयर बाजारों कल बुरा हाल था और इसकी गिरफ्त में एशिया के बाजार भी रहे। देश में महँगाई का आँकड़ा लगातार तीसरे सप्ताह गिरता हुआ दस अक्टूबर को समाप्त हुए सप्ताह में 11.07 प्रतिशत रह गया। कच्चे तेल की कीमतें 16 माह के न्यूतनतम स्तर पर थीं, किंतु बिकवाली के बोझ में ये सभी सकारात्मक रुख दब गए।
सत्र की शुरुआत में ही सेंसेक्स कल के 10169.90 अंक की तुलना में 486 अंक नीचे 9683.41 अंक पर खुला और नीचे में 9681.28 अंक तक गिरने के बाद महँगाई के आँकड़ों में गिरावट के मद्देनजर मिले समर्थन से ऊँचे में 10260.55 अंक तक चढ़ा, किंतु मुनाफा वसूली का दबाव रहने से अपने इस स्तर को बनाए नहीं रख सका और 398.20 अंक अर्थात 3.92 प्रतिशत के नुकसान से 9771.70 अंक पर बंद हुआ। शुक्रवार को सूचकांक पहली जून 2006 के बाद पहली बार 10 हजार अंक से नीचे 9975 अंक तक गिरा था।
बीएसई में बिकवाली का दबाव इतना अधिक था कि धातु सूचकांक में 11 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई। ऑटो मोबाइल सूचकांक सात प्रतिशत से अधिक गिरा। कैपिटल गुड्स और कंज्यूमर ड्यूरेबल में मामूली बढ़त देखी गई।
एनएसई के निफ्टी का हाल भी सेंसेक्स की तरह ही था। यह 29 जुलाई 2006 के बाद पहली बार 3000 अंक से नीचे उतरा और समाप्ति पर कुल 122 अंक अर्थात 3.98 प्रतिशत से 2943.15 अंक पर बंद हुआ। 29 जुलाई 2006 को निफ्टी का स्तर 2997.90 अंक था। निफ्टी जूनियर में 3.54 प्रतिशत और मिडकैप में 3.29 प्रतिशत की गिरावट आई।
बीएसई का मिडकैप 3.20 प्रतिशत अर्थात 111.67 अंक के नुकसान से 3378.72 अंक रह गया। स्मालकैप में 3965.70 अंक पर 3.55 प्रतिशत अर्थात 145.99 अंक निकल गए।
बीएसई में बिकवाली का दबाव इतना अधिक था कि 2596 कंपनियों के शेयरों में हुए कामकाज में 73.50 प्रतिशत अर्थात 1908 कंपनियों के शेयरों में नुकसान रहा। मात्र 23.96 प्रतिशत अर्थात 622 कंपनियों के शेयर बढ़े, जबकि 66 में स्थिरता थी। सेंसेक्स की तीस कंपनियों में 24 नुकसान और छह में बढ़त दर्ज की गई।
टाटा स्टील का शेयर सेंसेक्स में शामिल 30 कंपनियों में सबसे अधिक टूटा। कारोबार के दौरान नीचे में 205.70 रुपए तक गिरने के बाद सत्र की समाप्ति पर यह 14.85 प्रतिशत अर्थात 36.35 रुपए के नुकसान से 208.45 रुपए पर बंद हुआ। टाटा मोटर्स के शेयर को भी 14.57 प्रतिशत का झटका लगा। सत्र की समाप्ति पर यह 200 रुपए से नीचे लुढ़कता हुआ 33.25 रुपए गिरकर 195 रुपए रह गया।
हिंडाल्को इंडस्ट्रीज में 52.75 रुपए पर 13.10 रुपए अर्थात 7.95 रुपए की गिरावट आई। औषधि कंपनी रैनबैक्सी के शेयर में 229.95 रुपए पर 10.94 प्रतिशत अर्थात सवा अट्ठाईस रुपए की गिरावट आई।
सेंसेक्स में सर्वाधिक भारांक रखने वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर में 1215.25 रुपए पर 7.62 प्रतिशत अर्थात 100.30 रुपए की गिरावट दर्ज की गई। नुकसान वाली पहली बीस कंपनियों के अन्य शेयरों में महिन्द्रा एंड महिन्द्रा, मारुति सुजुकी, आईसीआईसीआई बैंक, भारती एयरटेल, एचडीएफसी, स्टरलाइट इंडस्ट्रीज, जयप्रकाश एसोसिएट्स, रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर, एसबीआई, हिन्दुस्तान यूनीलीवर, टाटा पॉवर, सत्यम कम्प्यूटर, विप्रो लिमिटेड, रिलायंस कम्युनिकेशंस और एसीसी के शेयर थे।
लाभ वाली सूची में सर्वाधिक बढ़त ग्रासिम इंडस्ट्रीज के शेयर में 4.74 प्रतिशत की रही। कंपनी का शेयर 54.95 रुपए के लाभ से 1215 रुपए पर बंद हुआ। भेल का शेयर 31.25 रुपए अर्थात 2.74 प्रतिशत बढ़कर 1170.35 रुपए पर पहुँच गया। एचडीएफसी बैंक, ओएनजीसी, टीसीएस और एलएंडटी के शेयर सेंसेक्स के अन्य फायदे वाले शेयर थे। |