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आर्थिक नहीं मनोवैज्ञानिक फायदा होगा
अमेरिकी आर्थिक राहत पैकेज का भारत पर प्रभाव
- मनीष उपाध्याय
अमेरिकी संसद द्वारा वहाँ की कंपनियों को मृतप्राय होती कंपनियों को राहत देने (बेलआउट) प्लान का भारत की अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर असर दिखने की संभावना नगण्य है। माना जा रहा है कि बेलआउट प्लान का भारत को आर्थिक नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक फायदा होगा।

विश्लेषकों का कहना है कि यह फायदा भी सिर्फ कुछ समय के लिए होगा किंतु निवेशकों में भय बना हुआ है कि यह पैकेज भी खंडहर होने की ओर अग्रसर होती अमेरिकी अर्थव्यवस्था में कोई राहत दे पाएगा।

शुक्रवार रात अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव ने ढहती अमेरिकी कंपनियों को आर्थिक मदद देकर पुनर्जीवित करने के लिए पेश 700 अरब डॉलर के पैकेज को मंजूरी दे दी किंतु इस पैकेज में क्या-क्या सूक्ष्म प्रावधान किए गए हैं इनका ज्यादा खुलासा अभी नहीं हुआ है।

अमेरिकी बेलआउट पैकेज या आर्थिक राहत पैकेज भले ही मंजूर हो गया है, लेकिन भारत को इससे ज्यादा उत्साहित होने की आवश्यकता नहीं है। विश्लेषकों का कहना है कि इस बार के बजाए पहले पेश प्रस्ताव के प्रावधान अधिक लाभकारी थे। दूसरे प्रस्ताव में अधिक नियम-बंधन लगा दिए गए हैं।

इसके अलावा अमेरिकी आर्थिक संकट की तीव्रता की तुलना में 700 अरब डॉलर का पैकेज अमेरिका के लिए ही नाकाफी माना जा रहा है। ऐसे में यह उम्मीद नहीं की जा सकती है कि इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के रूप में कोई सफलता मिल जाएगी।

क्या भारत के शेयर बाजार को फायदा होगा : भारत के शेयर या पूँजी बाजार को फायदा मिलने की उम्मीद कम ही है। विश्लेषकों का कहना है कि भारत का शेयर बाजार अमेरिकी शेयर बाजारों का अनुसरण करते हैं। शुक्रवार को पैकेज (विधेयक) पारित कर देने के बाद वहाँ के शेयर बाजार का सूचकांक डो-जोन्स ही गिर गया।

इसके मायने यहीं है कि अमेरिकी शेयर बाजारों ने ही पैकेज को मंजूर नहीं किया है। सोमवार को इसका असर भारतीय शेयर बाजारों पर भी पड़ने की पूरी आशंका जताई जा रही है। विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका कांग्रेस द्वारा बेलआउट पैकेज पारित करने से भारत के निवेशकों को सिर्फ मनोवैज्ञानिक फायदा होगा, वह भी अल्प अवधि के लिए।

* अमेरिकी अर्थव्यवस्था की स्थिति पहले से ही दयनीय है पैकेज से उसे ही ज्यादा राहत मिलने की उम्मीद कम है। ऐसे में भारत को राहत की उम्मीद करना गलत होगा। -अजीत जैन, निदेशक, अजीत जैन सिक्योरिट

* अमेरिकी बेलआउट प्लान का भारत की अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर नकारात्मक प्रभाव ही पड़ेगा। पैकेज का सिर्फ मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ेगा, उससे ज्यादा कुछ नहीं होगा। -निशांत न्याती, रीजनल डायरेक्टर आनंद राठी सिक्योरिटी
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