एक के बाद एक वित्तीय संस्थानों के वैश्विक ऋण संकट का शिकार होने के कारण विश्वभर में विभिन्न सरकारों द्वारा घोषित बेलआउट पैकेज अब करीब 2 हजार अरब डॉलर का रुख कर रहा है। यह राशि भारतीय अर्थव्यवस्था के मुकाबले लगभग दोगुनी है।
अमेरिकी कांग्रेस द्वारा देश के संकटग्रस्त वित्तीय संस्थानों को 700 अरब डॉलर की सहायता दिए जाने की मंजूरी को मिला दें तो सिर्फ अमेरिकी सरकार ने ही अब तक 990 अरब डॉलर की सहायता दी है। इसके अलावा कुछ यूरोपीय देशों ने भी लगभग इतनी की राशि के पैकेज की घोषणा की है, ताकि संकटग्रस्त वित्तीय इकाइयों को बचाया जा सके।
उम्मीद है कि यूरोप में सरकारी मदद के और उदाहरण सामने आएँगे, क्योंकि कहा जा रहा है कि यह संकट इस क्षेत्र में तेजी से फैलेगा। हालाँकि भारत में ऐसी किसी स्थिति की उम्मीद नहीं है, क्योंकि यहाँ ज्यादातर वित्तीय संस्थान इस संकट के प्रत्यक्ष प्रभाव से सुरक्षित हैं।
फिर भी अमेरिका और यूरोप द्वारा तैयार कुल बेलआउट पैकेज फिलहाल 1800 अरब डॉलर का है, जो जल्दी ही भारतीय अर्थव्यवस्था के आकार के दोगुना हो जाएगा।
वित्त वर्ष 2007-08 के दौरान भारत का सकल घरेलू उत्पाद अनुमानतः 46 लाख 93 हजार 602 करोड़ रुपए का रहा, जो डॉलर के मौजूदा विनिमय मूल्य के लिहाज से 1000 अरब डॉलर से थोड़ा ही अधिक है। फिलहाल रुपया डॉलर के मुकाबले 46.8 के स्तर पर है। अमेरिका से यूरोप तक वित्तीय संकट के गहराने के कारण बड़ी कंपनियों और विशेष तौर पर बैंकिंग उद्योग पर मार पड़ी है। |